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सरहदों के पार दोस्ती: लाहौर के 'ईटन' में पाकिस्तानी मित्र ने भारतीय 'दोस्त' को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 10:40 pm
लाहौर के प्रसिद्ध एचिसन कॉलेज में 100 वर्षीय सैयद बाबर अली ने अपने दिवंगत भारतीय मित्र और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री हरचरण सिंह बराड़ की याद में एक क्लासरूम समर्पित किया है।
विभाजन की लकीरें जमीन को तो बांट सकती हैं, लेकिन साझा यादों और बचपन की दोस्ती को मिटाना नामुमकिन है। इसकी एक बेहद भावुक मिसाल पाकिस्तान के लाहौर स्थित ऐतिहासिक एचिसन कॉलेज में देखने को मिली है। 'पूर्व के ईटन' (Eton of the East) के नाम से मशहूर इस संस्थान में एक क्लासरूम को अब भारतीय पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री हरचरण सिंह बराड़ के नाम से जाना जाएगा। यह श्रद्धांजलि उनके सहपाठी रहे 100 वर्षीय पाकिस्तानी उद्योगपति और परोपकारी सैयद बाबर अली ने दी है।
सैयद बाबर अली और हरचरण सिंह बराड़ ने 1940 के दशक में अविभाजित पंजाब के इस प्रतिष्ठित कॉलेज में एक साथ पढ़ाई की थी। 1947 में हुए विभाजन ने दोनों को अलग-अलग देशों का नागरिक बना दिया, लेकिन उनके बीच का स्नेह कभी कम नहीं हुआ। बराड़ बाद में भारतीय राजनीति में एक बड़ा नाम बने और पंजाब के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली, जबकि बाबर अली ने पाकिस्तान में व्यापार और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। अब, अपने दोस्त की स्मृति को जीवित रखने के लिए बाबर अली ने कॉलेज के एक कमरे के नवीनीकरण के लिए वित्त पोषण किया है और उसे अपने दोस्त के नाम पर समर्पित किया है।
एचिसन कॉलेज का यह कदम केवल दो दोस्तों की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस साझा विरासत को सहेजने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है, जिसे इतिहास की उथल-पुथल ने बिखेर दिया था। कॉलेज प्रशासन अब अपने 1947 से पहले के पूर्व छात्रों और शिक्षकों को सम्मानित करने की पहल कर रहा है, जिन्होंने उपमहाद्वीप के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह उन छात्रों की जड़ों को तलाशने का प्रयास है जो आज भारत, पाकिस्तान और दुनिया के अन्य कोनों में बसे हुए हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से पंजाबी प्रवासियों के लिए यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले कई परिवारों की जड़ें अविभाजित पंजाब से जुड़ी हैं। मेलबर्न में रहने वाले एक पंजाबी समुदाय के सदस्य ने कहा, "ऐसी कहानियाँ हमें याद दिलाती हैं कि हमारी संस्कृति और आपसी रिश्ते राजनीतिक सीमाओं से कहीं ऊपर हैं। लाहौर में किसी भारतीय नेता का इस तरह सम्मान होना आपसी सद्भाव का एक बड़ा संदेश है।"
यह पहल ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में अक्सर तनाव देखा जाता है। हालांकि, एचिसन कॉलेज की दीवारों के भीतर बराड़ का नाम अब आने वाली पीढ़ियों को यह बताएगा कि कभी यह पूरा क्षेत्र एक था और यहाँ के संस्थानों ने उन नेताओं को गढ़ा जिन्होंने आधुनिक भारत और पाकिस्तान की नींव रखी। सैयद बाबर अली का यह प्रयास न केवल एक व्यक्तिगत श्रद्धांजलि है, बल्कि यह विभाजन के दर्द पर दोस्ती का मरहम लगाने जैसा है।
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