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पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल ने LADCS योजना के विरोध में बढ़ाया समर्थन, योजना की समीक्षा की मांग

ICN24 Newsroom 29 जुल॰ 2026, 06:37 pm
पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल ने LADCS योजना के विरोध में बढ़ाया समर्थन, योजना की समीक्षा की मांग

पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल ने कानूनी सहायता रक्षा परिषद प्रणाली (LADCS) के खिलाफ वकीलों के आंदोलन का समर्थन करते हुए इसे वापस लेने और इसकी समीक्षा करने की मांग की है।

पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के कानूनी हलकों में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल ने 'लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम' (LADCS) के खिलाफ वकीलों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। अधिवक्ताओं के इस वैधानिक निकाय ने हाल ही में आयोजित एक महत्वपूर्ण उप-समिति की बैठक के बाद यह स्पष्ट किया कि इस योजना को वर्तमान स्वरूप में लागू करना न्याय प्रणाली और वकीलों के हितों के लिए उचित नहीं है। बार काउंसिल की उप-समिति ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में चल रहे आंदोलन की समीक्षा की। समिति का मानना है कि LADCS योजना को व्यापक परामर्श के बिना लागू किया गया है, जिससे वकीलों के बीच असुरक्षा और नाराजगी की भावना पैदा हुई है। परिषद ने केंद्र सरकार और संबंधित न्यायिक अधिकारियों से इस योजना को तुरंत वापस लेने या कम से कम इसकी गहन समीक्षा करने की अपील की है। अधिवक्ताओं का मुख्य तर्क यह है कि यह प्रणाली स्वतंत्र कानूनी अभ्यास को प्रभावित करती है और कानूनी सहायता की गुणवत्ता के साथ समझौता कर सकती है। लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) को राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य आपराधिक मामलों में गरीबों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना है। हालांकि, बार काउंसिल और विभिन्न बार एसोसिएशनों का तर्क है कि मौजूदा 'पैनल सिस्टम' अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत था। नई प्रणाली में कुछ चुनिंदा वकीलों को ही कानूनी सहायता के लिए नियुक्त किया जाता है, जिससे जूनियर वकीलों के अवसरों में कमी आने की संभावना जताई जा रही है। इस मामले का महत्व ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा मूल के लोगों के लिए भी है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे कई एनआरआई (NRI) अपने पैतृक राज्यों में संपत्ति, पारिवारिक विवाद या अन्य नागरिक और आपराधिक मामलों से जूझ रहे होते हैं। भारत में कानूनी ढांचे में किसी भी प्रकार का बदलाव सीधे तौर पर उनके मामलों की सुनवाई और न्याय की गति को प्रभावित करता है। यदि स्थानीय बार काउंसिल और न्यायिक अधिकारियों के बीच गतिरोध बना रहता है, तो इससे अदालती कार्यवाही में देरी हो सकती है, जिसका खामियाजा विदेशों में रहने वाले भारतीयों को भी भुगतना पड़ सकता है। बार काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि वे वकीलों के अधिकारों और न्याय प्रणाली की गरिमा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। परिषद ने आगामी दिनों में इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं और उम्मीद जताई है कि सरकार वकीलों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। वकीलों के संघ का कहना है कि जब तक उनकी चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता, तब तक वे अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। यह स्थिति पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय सहित जिला अदालतों के कामकाज को आने वाले हफ्तों में प्रभावित कर सकती है।
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