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बिहार सरकार का बड़ा फैसला: प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमे होंगे वापस, जेल से रिहा होंगे युवा
ICN24 Newsroom 28 जुल॰ 2026, 04:35 am
बिहार सरकार ने नीट और भर्ती परीक्षाओं के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने और गिरफ्तार युवाओं को रिहा करने का फैसला किया है।
बिहार सरकार ने राज्य में हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्रों और युवाओं के खिलाफ दर्ज किए गए सभी मुकदमों और प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) को वापस लेने का एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह कदम उन हजारों छात्रों के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, जो पिछले कुछ हफ्तों से सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं और नीट (NEET) परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर सड़कों पर थे। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद, अब उन सभी युवाओं को रिहा किया जाएगा जिन्हें विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था।
यह निर्णय नागरिक अधिकार संगठनों (CJP), छात्र यूनियनों और विपक्षी दलों द्वारा सरकार को दी गई कड़ी चेतावनी के बाद आया है। विपक्षी नेताओं ने धमकी दी थी कि यदि गिरफ्तार छात्रों को तुरंत रिहा नहीं किया गया और उन पर से फर्जी मुकदमे नहीं हटाए गए, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन और 'बिहार बंद' का आह्वान करेंगे। प्रशासन के इस रुख में बदलाव को राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, जहाँ युवाओं का असंतोष एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभरा है।
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों बिहार के कई जिलों में विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया था। सिवान जिले में स्थिति विशेष रूप से गंभीर हो गई थी, जहाँ प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प के बाद पुलिस को गोलियां चलानी पड़ी थीं। इस घटना में तीन प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे, जिसके बाद सरकार की चौतरफा आलोचना हुई थी। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने पुलिसिया कार्रवाई को 'दमनकारी' करार दिया था।
शिक्षा और रोजगार भारत की राजनीति के केंद्र में हैं और बिहार जैसे राज्य में, जहाँ एक बड़ी आबादी प्रतियोगी परीक्षाओं पर निर्भर है, वहां इस तरह के आंदोलनों का गहरा प्रभाव पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे बिहार और उत्तर भारत के प्रवासियों के कई रिश्तेदार और परिचित इन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। प्रवासी समुदाय अक्सर भारत में शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग का समर्थन करता रहा है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, गृह विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन मामलों की समीक्षा करें जो केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन से संबंधित थे। हालांकि, गंभीर हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले विशिष्ट मामलों की जांच जारी रह सकती है, लेकिन सामान्य तौर पर 'छात्र हित' को ध्यान में रखते हुए उदारता बरतने की बात कही गई है। छात्र नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही मांग की है कि भविष्य में परीक्षाओं के आयोजन में पूरी पारदर्शिता बरती जाए ताकि छात्रों को सड़कों पर न उतरना पड़े।
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