राजनीति
राष्ट्रपति चुनाव फॉर्मूले पर भाजपा की नज़र: क्या कांग्रेस के 19 विधायकों की 'क्रॉस-वोटिंग' दोहराएगी इतिहास?
ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 02:00 pm

राष्ट्रपति चुनाव में हुई क्रॉस-वोटिंग के बाद भाजपा अब आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए रणनीति बना रही है, जहां उसे जीत के लिए कांग्रेस के बागी विधायकों के समर्थन की दरकार है।
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गई है। पार्टी का मुख्य ध्यान उन समीकरणों पर है जो पिछले राष्ट्रपति चुनाव के दौरान देखने को मिले थे, जब कांग्रेस के 19 विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया था। भाजपा अब इसी 'क्रॉस-वोटिंग' फॉर्मूले के जरिए राज्यसभा की तीसरी सीट पर कब्ज़ा जमाने की जुगत में है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा नेतृत्व उन कांग्रेस विधायकों की पहचान कर रहा है जो अपनी वर्तमान पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से असंतुष्ट हैं। सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा की तीसरी सीट सुरक्षित करने के लिए भाजपा को कम से कम सात अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। राष्ट्रपति चुनाव के दौरान हुए घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया था कि विपक्षी खेमे में सब कुछ ठीक नहीं है, और भाजपा इसी आंतरिक कलह का लाभ उठाने की योजना बना रही है।
राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस के भीतर के असंतोष को उजागर कर दिया था। उस समय 19 विधायकों द्वारा किया गया विद्रोह पार्टी के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ था। अब भाजपा की सक्रियता ने कांग्रेस खेमे में हलचल तेज कर दी है। पार्टी आलाकमान अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन असंतुष्ट गुट की खामोशी चिंता का विषय बनी हुई है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए भारत की यह आंतरिक राजनीति विशेष महत्व रखती है। भारत-ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते संबंधों के बीच, भारत की राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत निरंतरता पर वैश्विक नजर रहती है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे भारतीय समुदाय के लोग अक्सर इन घटनाक्रमों पर चर्चा करते हैं, क्योंकि भारत में होने वाले सत्ता परिवर्तन या गठबंधन की राजनीति का सीधा असर निवेश और द्विपक्षीय समझौतों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भाजपा इस फॉर्मूले को दोहराने में सफल रहती है, तो यह न केवल राज्यसभा में उसकी स्थिति मजबूत करेगा, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के मनोबल को भी कमजोर करेगा। कांग्रेस के लिए चुनौती केवल भाजपा से लड़ने की नहीं, बल्कि अपने ही घर को बिखरने से बचाने की है। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा उन सात विधायकों का समर्थन जुटा पाती है, या कांग्रेस अपनी घेराबंदी मजबूत करने में सफल होती है।
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