राजनीति
ब्राजील के अर्थशास्त्रियों ने 2026-27 के लिए मुद्रास्फीति और ब्याज दरों के अनुमान में की बढ़ोतरी
ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 12:30 am

ब्राजील के केंद्रीय बैंक के हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, अर्थशास्त्रियों ने 2026 और 2027 के लिए मुद्रास्फीति और ब्याज दरों (Selic) के अपने अनुमानों को बढ़ा दिया है।
ब्राजील के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी नवीनतम 'फोकस' बाजार सर्वेक्षण के अनुसार, प्रमुख अर्थशास्त्रियों और वित्तीय विशेषज्ञों ने देश की भविष्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए मुद्रास्फीति और ब्याज दरों (Selic rate) के अपने अनुमानों में उल्लेखनीय वृद्धि की है। यह संशोधन मुख्य रूप से वर्ष 2026 और 2027 के लिए किया गया है, जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ती अनिश्चितता को दर्शाता है।
सर्वेक्षण के ताजा आंकड़ों के अनुसार, विश्लेषकों ने अब 2026 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (IPCA) के अनुमान को बढ़ा दिया है। यह लगातार बढ़ता रुझान बाजार में इस चिंता को गहरा कर रहा है कि लंबे समय तक महंगाई का दबाव बना रह सकता है। इसी तरह, 2027 के लिए भी मुद्रास्फीति के अनुमानों में ऊपर की ओर सुधार किया गया है, जो दर्शाता है कि मध्यम अवधि में कीमतों पर नियंत्रण पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
मुद्रास्फीति के इन बढ़ते अनुमानों के जवाब में, अर्थशास्त्रियों ने सेलिक दर (Selic rate), जो कि ब्राजील की बेंचमार्क ब्याज दर है, के लिए भी अपने पूर्वानुमानों को बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक को महंगाई पर लगाम लगाने के लिए अपनी सख्त मौद्रिक नीति को लंबे समय तक जारी रखना होगा। ब्याज दरों में यह संभावित बढ़ोतरी कर्ज लेने की लागत को बढ़ा सकती है, जिससे आर्थिक विकास की गति पर असर पड़ने की संभावना है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय और निवेशकों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि ब्राजील और भारत दोनों ही प्रमुख उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं (BRICS सदस्य) हैं। वैश्विक वित्तीय बाजारों में जब एक बड़ी उभरती अर्थव्यवस्था अपनी ब्याज दरों और मुद्रास्फीति के अनुमानों में बदलाव करती है, तो इसका असर वैश्विक निवेश पोर्टफोलियो और विदेशी संस्थागत निवेश (FII) के प्रवाह पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत भारतीय पेशेवर, जो वैश्विक परिसंपत्तियों या उभरते बाजारों में निवेश करते हैं, उन्हें इन बदलावों पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि यह वैश्विक तरलता को प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि राजकोषीय अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों ने इन संशोधनों में बड़ी भूमिका निभाई है। ब्राजील के इस कदम से अन्य विकासशील देशों के केंद्रीय बैंकों पर भी दबाव बढ़ सकता है कि वे अपनी घरेलू मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को उच्च स्तर पर बनाए रखें। आने वाले महीनों में, बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि ब्राजील का केंद्रीय बैंक इन अनुमानों के आधार पर अपनी आधिकारिक नीति में क्या बदलाव करता है।
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