राजनीति
मुंबई: दूसरे दिन भी थमी बेस्ट बसों की रफ्तार, मांगों को लेकर अड़े कर्मचारी; सरकार से वार्ता की अपील
ICN24 Newsroom 21 जून 2026, 02:11 am

मुंबई में बेस्ट (BEST) कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी है, जिससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। संयुक्त श्रमिक कृती समिति ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
मुंबई की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) के कर्मचारियों का आंदोलन शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। इस हड़ताल के कारण महानगर की सड़कों से बेस्ट बसें नदारद रहीं, जिससे लाखों यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। संयुक्त श्रमिक कृती समिति के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन में सभी श्रमिक संगठनों ने अपने आपसी मतभेदों और राजनीतिक झंडों को किनारे रखकर एकजुटता का परिचय दिया है।
आंदोलनकारियों का दावा है कि 18 जून की मध्यरात्रि से शुरू हुई इस हड़ताल में कर्मचारियों की 100 प्रतिशत भागीदारी रही है। डिपो के बाहर सन्नाटा पसरा हुआ है और कोई भी बस सड़क पर नहीं उतरी। समिति के नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस चर्चा नहीं करती और लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक यह गतिरोध बना रहेगा। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में वेतन विसंगतियों को दूर करना, अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों की स्थिति में सुधार और बेस्ट उपक्रम के बजट को नगर निगम के बजट के साथ जोड़ने जैसी पुरानी मांगें शामिल हैं।
मुंबई जैसे सघन आबादी वाले शहर में बेस्ट बसों का बंद होना जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित करता है। विशेष रूप से उन इलाकों में जहां लोकल ट्रेन कनेक्टिविटी कम है, वहां लोग पूरी तरह इन बसों पर निर्भर हैं। हड़ताल का फायदा उठाकर ऑटो और टैक्सी चालकों द्वारा अधिक किराया वसूलने की खबरें भी सामने आ रही हैं। हालांकि, प्रशासन ने कुछ अतिरिक्त ट्रेनें और निजी बसें चलाने का प्रयास किया है, लेकिन वे बेस्ट के विशाल नेटवर्क का विकल्प बनने में नाकाम रही हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से सिडनी और मेलबर्न में बसे मुंबई मूल के लोगों के लिए यह खबर चिंता का विषय है। कई प्रवासी भारतीयों के बुजुर्ग माता-पिता और रिश्तेदार आज भी मुंबई में अपनी दैनिक आवाजाही के लिए बेस्ट पर निर्भर हैं। सिडनी में रहने वाले एक पूर्व मुंबईवासी ने बताया कि जिस तरह ऑस्ट्रेलिया के बड़े शहरों में सार्वजनिक परिवहन का ठप होना पूरे शहर को रोक देता है, मुंबई में बेस्ट की हड़ताल उससे कहीं अधिक भयावह है क्योंकि वहां परिवहन के अन्य साधन पहले से ही अपनी क्षमता से अधिक बोझ उठा रहे हैं।
संयुक्त श्रमिक कृती समिति ने स्पष्ट किया है कि यह लड़ाई केवल वेतन की नहीं, बल्कि बेस्ट के अस्तित्व को बचाने की है। समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे आम जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन सरकार की उदासीनता ने उन्हें इस कठोर कदम के लिए मजबूर किया है। अब सबकी निगाहें राज्य सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वे जल्द ही वार्ता की मेज पर आएंगे या मुंबईवासियों की यह परेशानी अभी और लंबी खिंचेगी।
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