राजनीति
तृणमूल के 15 वर्षों के शासन में भ्रष्टाचार ने हर क्षेत्र को किया प्रभावित: सुवेंदु अधिकारी
ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 04:00 am

सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 2011 से पश्चिम बंगाल के हर विभाग में भ्रष्टाचार जड़ें जमा चुका है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले 15 वर्षों के शासन के दौरान भ्रष्टाचार ने सरकारी कामकाज के हर पहलू को खोखला कर दिया है। रविवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान अधिकारी ने दावा किया कि 2011 से 2026 तक के संभावित कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार का प्रभाव इतना व्यापक रहा है कि अब नई प्रशासनिक चुनौतियों के बीच इसके गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं।
अधिकारी ने जोर देकर कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण विभागों में पारदर्शिता का अभाव रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रियाओं से लेकर सार्वजनिक वितरण प्रणालियों तक, बिचौलियों और सत्ताधारी दल के करीबी लोगों का बोलबाला रहा। उनके अनुसार, वर्तमान में जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही कार्रवाई केवल हिमशैल का सिरा मात्र है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, तृणमूल शासन के कई और 'काले कारनामे' उजागर होंगे।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहा यह वाकयुद्ध अब केवल राज्य तक सीमित नहीं रह गया है। ऑस्ट्रेलिया में बसे प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेषकर पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले बंगाली समुदाय के लोग अक्सर राज्य में निवेश और विकास की कमी को लेकर चिंता जताते हैं। अधिकारी के इन बयानों को प्रवासी समुदाय एक ऐसे परिप्रेक्ष्य में देख रहा है जहां भ्रष्टाचार ने राज्य की आर्थिक प्रगति को बाधित किया है, जिससे युवाओं को रोजगार की तलाश में विदेश या अन्य राज्यों का रुख करना पड़ा है।
सुवेंदु अधिकारी ने यह भी संकेत दिया कि आगामी विधानसभा चुनावों तक वह इन मुद्दों को जनता के बीच ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि जनता अब बदलाव चाहती है और वह उस शासन से तंग आ चुकी है जिसने केवल अपने कार्यकर्ताओं का भला किया है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को निराधार बताया है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि सुवेंदु अधिकारी राजनीतिक द्वेष के चलते ऐसे बयान दे रहे हैं और राज्य सरकार ने हमेशा जनता के कल्याण के लिए काम किया है।
जैसे-जैसे राज्य में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ रही है, केंद्र और राज्य के बीच टकराव के नए मोर्चे खुल रहे हैं। सुवेंदु अधिकारी का यह बयान न केवल राज्य की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि यह विदेशों में रहने वाले उन भारतीय नागरिकों के लिए भी एक संकेत है जो अपनी मातृभूमि के सुशासन और पारदर्शी प्रशासन की उम्मीद रखते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये आरोप चुनावी जमीन पर क्या प्रभाव डालते हैं।
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