टेक्नोलॉजी
ब्रह्मांडीय रहस्य से उठा पर्दा: अंटार्कटिका के 'आइसक्यूब' टेलीस्कोप ने सुदूर आकाशगंगा से आने वाले न्यूट्रिनो कण का पता लगाया
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 02:39 pm

वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका के आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी के जरिए एक शक्तिशाली न्यूट्रिनो को 'शैडो ब्लास्टर' नामक सुदूर आकाशगंगा से जोड़ा है, जो खगोल विज्ञान में एक बड़ी उपलब्धि है।
अंटार्कटिका की बर्फीली गहराइयों में स्थित 'आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी' के वैज्ञानिकों ने खगोल भौतिकी (Astrophysics) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। शोधकर्ताओं ने एक उच्च-ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो, जिसे अक्सर 'भूतिया कण' (ghost particle) कहा जाता है, के स्रोत का सफलतापूर्वक पता लगा लिया है। यह कण अरबों प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक सक्रिय आकाशगंगा से आया है, जिसे शोधकर्ताओं ने 'शैडो ब्लास्टर' (Shadow Blaster) का नाम दिया है।
न्यूट्रिनो ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमयी कणों में से एक हैं। इनका द्रव्यमान लगभग शून्य होता है और ये प्रकाश की गति के करीब चलते हैं। चूंकि इन पर कोई विद्युत आवेश (electric charge) नहीं होता, इसलिए ये तारों, ग्रहों और यहां तक कि हमारे शरीर के माध्यम से बिना किसी रुकावट के निकल जाते हैं। यही कारण है कि इनका पता लगाना और इनके मूल स्रोत की पहचान करना वैज्ञानिकों के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है।
इस खोज में 'ग्रेविटेशनल लेंसिंग' (Gravitational Lensing) की प्रक्रिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 'शैडो ब्लास्टर' एक ऐसी आकाशगंगा है जिसकी रोशनी और कण किसी अन्य विशाल पिंड के गुरुत्वाकर्षण के कारण मुड़कर पृथ्वी की दिशा में केंद्रित हो गए, जिससे वैज्ञानिकों के लिए इसके संकेतों को समझना आसान हो गया। यह आकाशगंगा एक 'स्टारबर्स्ट' गैलेक्सी है, जिसका अर्थ है कि यहाँ बहुत तीव्र गति से नए तारों का निर्माण हो रहा है, जो उच्च-ऊर्जा कणों के उत्सर्जन का मुख्य कारण हो सकता है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से गर्व का विषय है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ही वैश्विक वैज्ञानिक अनुसंधान और अंटार्कटिक मिशनों में सक्रिय भागीदार हैं। ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों के कई खगोलविद और भारतीय मूल के शोधकर्ता अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से इस तरह की जटिल परियोजनाओं में योगदान दे रहे हैं। यह खोज न केवल ब्रह्मांड की उत्पत्ति के रहस्यों को समझने में मदद करेगी, बल्कि भविष्य की नई तकनीकियों के लिए भी मार्ग प्रशस्त करेगी।
आइसक्यूब के मुख्य जांचकर्ताओं का मानना है कि यह खोज हमें यह समझने के करीब ले जाती है कि ब्रह्मांड में सबसे शक्तिशाली कॉस्मिक किरणें (Cosmic Rays) कहाँ से आती हैं। अब तक हम केवल प्रकाश और रेडियो तरंगों के माध्यम से ब्रह्मांड को देखते आए हैं, लेकिन न्यूट्रिनो खगोल विज्ञान हमें ब्रह्मांड को देखने का एक बिल्कुल नया और अनूठा नजरिया प्रदान करता है।
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