राजनीति
तृणमूल कांग्रेस में बड़ी बगावत: शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान सहित 19 सांसदों ने छोड़ा ममता बनर्जी का साथ
ICN24 Newsroom 10 जून 2026, 08:30 pm
ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी में बड़ी फूट की खबर है। शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान सहित 19 लोकसभा सांसदों ने काकोली घोष के नेतृत्व में अलग गुट बना लिया है।
पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस समय अपने सबसे गहरे राजनीतिक संकट से गुजर रही है। सूत्रों और समाचार एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के 19 लोकसभा सांसदों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी है। इस बागी गुट का नेतृत्व वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सूची में फिल्म स्टार शत्रुघ्न सिन्हा, पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान और ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वाली सायोनी घोष का नाम भी शामिल है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बागी गुट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भेजकर अपने अलग होने की सूचना दी है। काकोली घोष ने दावा किया है कि उनके पास 20 सांसदों का समर्थन है, जो पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो सदन में टीएमसी की ताकत काफी कम हो जाएगी और यह राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की छवि के लिए एक बड़ा झटका होगा।
केवल लोकसभा ही नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर भी ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। बताया जा रहा है कि अब तक कुल 58 विधायक और 2 राज्यसभा सांसद भी मुख्य पार्टी से अलग हो चुके हैं। टीएमसी के भीतर यह असंतोष पिछले कुछ समय से पनप रहा था, जिसे अब संगठित बगावत का रूप मिल गया है। बागी गुट का आरोप है कि पार्टी के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की जा रही है।
हालांकि, टीएमसी नेतृत्व ने इन दावों को सिरे से खारिज करने की कोशिश की है। पार्टी प्रवक्ता मानव जायसवाल ने एक बयान में कहा कि सायोनी घोष और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे नेता अभी भी पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं और बगावत की खबरें केवल अफवाह हैं। उन्होंने इसे विपक्षी दलों की साजिश करार दिया। इसके बावजूद, बागी सांसदों की सूची सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि पश्चिम बंगाल की राजनीति और वहां का प्रवासी समुदाय ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में काफी सक्रिय है। राजनीतिक स्थिरता या अस्थिरता का सीधा असर राज्य के विकास और अंतरराष्ट्रीय निवेश पर पड़ता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी इस संकट से कैसे निपटती हैं और क्या वे अपने कुनबे को बिखरने से बचा पाएंगी।
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