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दिल्ली की नई ईवी नीति: सिर्फ इंजन बदलने से नहीं, दिशा बदलने से होगा यातायात में सुधार

ICN24 Newsroom 6 अग॰ 2026, 11:39 pm
दिल्ली की नई ईवी नीति: सिर्फ इंजन बदलने से नहीं, दिशा बदलने से होगा यातायात में सुधार

दिल्ली सरकार की नई ईवी नीति दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए कड़े लक्ष्य निर्धारित करती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इलेक्ट्रिक वाहन भीड़भाड़ और असमानता को कम नहीं कर सकते।

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने और शहरी परिवहन को आधुनिक बनाने के लिए अपनी महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति के अगले चरण की घोषणा की है। इस नीति के केंद्र में दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए कड़े समय-सीमा और लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, साथ ही बुनियादी ढांचे और चार्जिंग स्टेशनों के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है। हालांकि, परिवहन विशेषज्ञों का तर्क है कि वाहन की तकनीक बदलने मात्र से दिल्ली की गहरी शहरी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, जब तक कि यात्रा की दिशा और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था में सुधार नहीं किया जाता। दिल्ली की नई नीति के तहत, ई-कॉमर्स कंपनियों और डिलीवरी सेवा प्रदाताओं के लिए अपने बेड़े को धीरे-धीरे पूरी तरह से इलेक्ट्रिक में बदलना अनिवार्य किया गया है। सरकार ने चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और सब्सिडी को भी बढ़ाया है। इस कदम का उद्देश्य राजधानी में कार्बन उत्सर्जन को कम करना और भारत के राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप परिवहन क्षेत्र को तैयार करना है। हालांकि, विशेषज्ञों का एक वर्ग इस ओर ध्यान आकर्षित कर रहा है कि केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को सड़कों पर उतारने से यातायात की भीड़ (कंजेशन) और सामाजिक असमानता दूर नहीं होगी। रिपोर्टों के अनुसार, यदि दिल्ली की सड़कों पर पेट्रोल कारों की जगह सिर्फ इलेक्ट्रिक कारें ले लेती हैं, तो भी सड़क पर वाहनों का दबाव कम नहीं होगा। असल चुनौती परिवहन के उस मॉडल को बदलने की है जो निजी वाहनों को प्राथमिकता देता है। दिल्ली में सार्वजनिक गतिशीलता (Public Mobility) सुधारों की सख्त आवश्यकता है, जिसमें बस नेटवर्क का विस्तार और सुरक्षित पैदल पथ शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया भी वर्तमान में अपनी राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक वाहन रणनीति (NEVS) पर काम कर रहा है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में, जहां बुनियादी ढांचा पहले से ही बेहतर है, वहां भी ईवी अपनाने की गति धीमी रही है। भारत के विपरीत, ऑस्ट्रेलिया में निजी यात्री वाहनों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है, जबकि दिल्ली का मॉडल छोटे वाहनों और वाणिज्यिक बेड़े पर केंद्रित है। दिल्ली की यह नीति प्रवासी भारतीयों को भारत में हो रहे शहरी बदलावों और निवेश की नई संभावनाओं के बारे में सूचित करती है। निष्कर्ष के तौर पर, दिल्ली की ईवी नीति एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इसे समग्र शहरी नियोजन के साथ जोड़ा जाना चाहिए। जब तक सार्वजनिक परिवहन की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक केवल 'इंजन बदलने' से दिल्ली के यातायात की 'दिशा' नहीं बदलेगी। सरकार को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के साथ-साथ 'मल्टी-मॉडल' परिवहन प्रणालियों में भी निवेश करने की आवश्यकता है ताकि हर वर्ग के लिए यात्रा सुलभ और प्रदूषण मुक्त हो सके।
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