राजनीति
फिरोजाबाद: कागजों तक सीमित रहा जन शिकायतों का निस्तारण, डीएम की समीक्षा में खुली लापरवाही की पोल
ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 08:31 am

फिरोजाबाद में जन शिकायतों के निस्तारण में भारी लापरवाही सामने आई है। डीएम संतोष कुमार शर्मा की समीक्षा बैठक में कई विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं।
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में जनसुनवाई और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (IGRS) के निस्तारण को लेकर प्रशासनिक मशीनरी की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिलाधिकारी रमेश रंजन द्वारा की गई हालिया समीक्षा बैठक में यह स्पष्ट हुआ कि कई सरकारी विभाग शिकायतों का वास्तविक समाधान करने के बजाय केवल कागजी खानापूर्ति कर रहे हैं। इस खुलासे के बाद जिले के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और लापरवाह अधिकारियों को कड़ी चेतावनी जारी की गई है।
समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने पाया कि विभिन्न विभागों को भेजी गई शिकायतों को बिना किसी ठोस कार्रवाई के 'निस्तारित' श्रेणी में डाल दिया गया था। जनता का आरोप है कि उनकी समस्याओं का धरातल पर कोई समाधान नहीं हुआ, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें संतुष्ट दिखा दिया गया। डीएम ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण शासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विशेष रूप से नगर निगम, विकास प्राधिकरण और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए। कई मामलों में यह देखा गया कि शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर के बिना ही रिपोर्ट लगा दी गई। डीएम ने निर्देश दिया कि भविष्य में यदि कोई गलत रिपोर्ट या फर्जी निस्तारण पाया गया, तो संबंधित विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को फील्ड में जाकर समस्याओं का जायजा लेने और फिर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
यह मुद्दा न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में बसे फिरोजाबाद और उत्तर प्रदेश के प्रवासी अक्सर अपने पैतृक घरों की जमीन-जायदाद और पारिवारिक मामलों के लिए ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग करते हैं। इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही प्रवासियों के भरोसे को भी चोट पहुँचाती है। ICN24 से बातचीत में कुछ स्थानीय निवासियों ने कहा कि जब तक उच्चाधिकारी औचक निरीक्षण नहीं करेंगे, तब तक निचले स्तर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है।
प्रशासन ने अब एक नई रणनीति तैयार की है जिसके तहत फीडबैक कॉल के जरिए शिकायतकर्ताओं से सीधे बात की जाएगी। यदि शिकायतकर्ता असंतुष्ट पाया जाता है, तो उस शिकायत को दोबारा खोला जाएगा और दोषी कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी। जिलाधिकारी ने सभी विभागाध्यक्षों को एक सप्ताह के भीतर लंबित मामलों को निपटाने का अल्टीमेटम दिया है।
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