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मिशन सुदर्शन चक्र: रक्षा मंत्री ने किया अत्याधुनिक मिसाइल हब का उद्घाटन, भारत की रणनीतिक शक्ति में नए युग का आगाज़
ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 04:31 am
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हैदराबाद में उन्नत हथियार प्रणाली परिसर का उद्घाटन किया। 'मिशन सुदर्शन चक्र' के तहत भारत अब त्रि-स्तरीय मिसाइल सुरक्षा कवच विकसित करेगा।
भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला (DRDL) में 'उन्नत हथियार प्रणाली परिसर' (Advanced Weapon System Complex) का उद्घाटन किया है। यह केंद्र स्वदेशी मिसाइल तकनीक और रणनीतिक हथियारों के विकास में तेजी लाने के लिए बनाया गया है, जो भारत को वैश्विक रक्षा मानचित्र पर एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों के शानदार प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीक ने वास्तविक युद्ध जैसी स्थितियों में अपनी सटीकता और मारक क्षमता साबित की है। यह सफलता भारत के रक्षा अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) की बढ़ती ताकत का प्रमाण है।
सरकार ने अब 'मिशन सुदर्शन चक्र' की परिकल्पना की है, जो कि एक त्रि-स्तरीय (three-layered) राष्ट्रीय मिसाइल सुरक्षा कवच होगा। इस मिशन का उद्देश्य भारत की सीमाओं को अभेद्य बनाना और किसी भी हवाई या रणनीतिक हमले का मुंहतोड़ जवाब देना है। यह अगली पीढ़ी का मिसाइल हब न केवल मौजूदा प्रणालियों को उन्नत करेगा, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए हाइपरसोनिक और निर्देशित हथियारों के निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रणनीतिक और रक्षा संबंधों (Quad के माध्यम से) के बीच, भारत का सैन्य रूप से आत्मनिर्भर होना हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रवासी भारतीय इसे भारत की बढ़ती 'हार्ड पावर' और वैश्विक मंच पर बढ़ते कद के रूप में देख रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अब केवल एक खरीदार देश नहीं रहा, बल्कि एक निर्माता और निर्यातक बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'आत्मनिर्भर भारत' का संकल्प रक्षा क्षेत्र में सबसे अधिक दिखाई दे रहा है, जहां घरेलू उद्योगों और निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है।
आने वाले वर्षों में, मिशन सुदर्शन चक्र के तहत विकसित होने वाली प्रणालियां भारत की रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं को एक नए स्तर पर ले जाएंगी। यह उन्नत परिसर अनुसंधान, परीक्षण और उत्पादन के बीच के अंतर को कम करेगा, जिससे नई तकनीकों को सेना में शामिल करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
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