राजनीति
गुरुग्राम के कपल का आरोप: दिल्ली के IVF सेंटर ने बेचा हमारा बच्चा, चुप रहने के लिए मिला करोड़ों का ऑफर
ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 11:30 am
गुरुग्राम के एक दंपत्ति ने दिल्ली के एक आईवीएफ केंद्र पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उनके जैविक बच्चे को बेच दिया गया और उन्हें चुप रहने के लिए करोड़ों रुपये की पेशकश की गई।
दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहाँ गुरुग्राम के एक रीयल एस्टेट व्यवसायी दंपत्ति ने दिल्ली के एक प्रतिष्ठित आईवीएफ (IVF) सेंटर पर चाइल्ड ट्रैफिकिंग और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित कपल, राहुल और मीनू राठौर का दावा है कि अस्पताल ने उनके जैविक भ्रूण से पैदा हुए बच्चे का सौदा किसी और के साथ कर लिया और उन्हें किसी और के बच्चे थमा दिए।
मामले का खुलासा तब हुआ जब जनवरी में मीनू राठौर ने दो जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया। परिवार के सदस्यों को बच्चियों की शक्ल माता-पिता से न मिलने पर संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने डीएनए (DNA) टेस्ट कराने का फैसला किया। लैब रिपोर्ट के परिणामों ने सबको चौंका दिया; रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि दोनों बच्चियों का डीएनए न तो उनकी मां से मेल खाता था और न ही उनके पिता से। यह बायोलॉजिकल मैच 0% पाया गया।
राहुल राठौर का आरोप है कि आईवीएफ प्रक्रिया में बारकोडिंग और डबल-विटनेसिंग जैसी सख्त प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। ऐसे में डीएनए का न मिलना कोई मानवीय भूल (Human Error) नहीं बल्कि एक सोची-समझी आपराधिक साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन एक संगठित चाइल्ड ट्रैफिकिंग रैकेट चला रहा है, जिसमें उनके बच्चे को मोटी रकम के बदले किसी और को बेच दिया गया है।
कपल ने यह भी खुलासा किया कि जब उन्होंने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाया और अस्पताल से लिखित जवाब मांगा, तो उन्हें डराने-धमकाने का सिलसिला शुरू हो गया। मीनू के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन ने मामले को रफा-दफा करने के लिए उन्हें करोड़ों रुपये देने का लालच दिया। जब उन्होंने इस समझौते से इनकार कर दिया, तो उन्हें जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए राहुल ने कहा कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक अस्पताल के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। अंततः कपल को न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। दंपत्ति का कहना है कि वे उन बच्चियों को भी पालने के लिए तैयार हैं जिन्हें उन्होंने जन्म दिया है, बशर्ते अस्पताल उनके अपने जैविक बच्चे को वापस लौटा दे।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर चिंताजनक है, क्योंकि कई एनआरआई (NRI) दंपत्ति उन्नत और किफायती इलाज के लिए भारत के आईवीएफ केंद्रों का रुख करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों से चिकित्सा पर्यटन और भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली की विश्वसनीयता पर गहरा असर पड़ सकता है। फिलहाल मामला विचाराधीन है और कपल ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
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