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हैदराबाद: खजागुडा में कूड़े के अवैध ढेर और जहरीले धुएं से बढ़ा प्रदूषण, स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश
ICN24 Newsroom 29 जुल॰ 2026, 11:35 am

खजागुडा में मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के पीछे कचरा जलाने की घटनाओं से स्थानीय निवासी परेशान हैं, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
हैदराबाद के तेजी से विकसित होते आईटी कॉरिडोर का हिस्सा, खजागुडा क्षेत्र इन दिनों एक गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रहा है। मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MANUU) के ठीक पीछे स्थित खाली भूखंडों पर कचरे के अवैध ढेर और उन्हें रात के अंधेरे में जलाए जाने की घटनाओं ने स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। यह क्षेत्र, जो कभी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और चट्टानी परिदृश्य के लिए जाना जाता था, अब जहरीले धुएं और गंदगी के ढेर में तब्दील होता जा रहा है।
स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार, इस खिंचाव (स्ट्रेच) पर निर्माण सामग्री, प्लास्टिक कचरा और घरेलू अपशिष्ट अवैध रूप से फेंका जा रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस कचरे को नष्ट करने के लिए अक्सर इसमें आग लगा दी जाती है। रात के समय उठने वाला काला और जहरीला धुआं आसपास की ऊंची इमारतों और रिहायशी कॉलोनियों में फैल जाता है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही है। निवासियों का कहना है कि सुबह की सैर के समय हवा में एक अजीब सी गंध और आंखों में जलन महसूस होती है, जो स्पष्ट रूप से जहरीले रसायनों के जलने का परिणाम है।
ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारियों ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। गश्त की कमी और कचरा डंप करने वालों पर भारी जुर्माना न लगाए जाने के कारण, यह क्षेत्र 'डंपिंग यार्ड' बन गया है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लोग, जिनका इस क्षेत्र में अक्सर आना-जाना रहता है या जिनके परिवार यहां रहते हैं, वे भी इस स्थिति पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। वे ऑस्ट्रेलिया के सख्त कचरा प्रबंधन नियमों और यहां की प्रशासनिक शिथिलता के बीच बड़े अंतर को देख रहे हैं।
विशेषज्ञों का चेतावनी देना है कि इस तरह खुले में कचरा जलाना न केवल वायु प्रदूषण को बढ़ाता है, बल्कि यह मिट्टी और भूजल को भी प्रदूषित कर रहा है। खजागुडा झील के पास होने के कारण, यहां से निकलने वाले जहरीले तत्व जल स्रोतों में भी मिल सकते हैं। स्थानीय निवासियों ने अब सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कचरा हटाना और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी शुरू नहीं की गई, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह समस्या केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक उभरते हुए 'ग्लोबल सिटी' की योजना और प्रबंधन पर भी एक बड़ा सवालिया निशान है।
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