ब्रेकिंग न्यूज़ब्रेकिंग
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 'डिजिटल अरेस्ट' और साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ जारी किए ऐतिहासिक निर्देश
ICN24 Newsroom 5 अग॰ 2026, 04:37 am

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए केंद्र और राज्यों को कड़े निर्देश दिए हैं, जो भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने देश में बढ़ते 'डिजिटल अरेस्ट' और साइबर धोखाधड़ी के मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने 4 अगस्त, 2026 को भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की रिपोर्ट की समीक्षा के बाद यह आदेश दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि तकनीक का दुरुपयोग कर नागरिकों को डराने-धमकाने वाले गिरोहों के खिलाफ अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।
'डिजिटल अरेस्ट' एक ऐसा नया तरीका है जिसमें साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं। वे पीड़ितों को बताते हैं कि उनके नाम से कोई अवैध पार्सल आया है या वे किसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे हैं। इसके बाद पीड़ितों को घंटों तक वीडियो कॉल पर 'डिजिटल हिरासत' में रखा जाता है और गिरफ्तारी से बचने के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूली जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह न केवल वित्तीय अपराध है, बल्कि नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का भी हनन है।
न्यायालय ने अपने निर्देशों में कहा है कि प्रत्येक राज्य में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाना चाहिए जो बैंक खातों को तुरंत फ्रीज करने के लिए बैंकों के साथ समन्वय करे। इसके साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे खातों और विज्ञापनों को तुरंत हटाने का निर्देश दिया गया है जो ठगी को बढ़ावा देते हैं। न्यायालय ने यह भी अनिवार्य किया है कि बैंक संदिग्ध लेनदेन की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करें और किसी भी असामान्य गतिविधि पर तुरंत अलर्ट जारी करें।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। अक्सर देखा गया है कि साइबर अपराधी एनआरआई (NRI) समुदाय को भी निशाना बनाते हैं। स्कैमर्स ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीयों को फोन कर भारत में उनके परिजनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी देते हैं या भारत में उनकी संपत्तियों से जुड़े फर्जी मुकदमों का हवाला देकर पैसे मांगते हैं। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद, भारत में पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियां अधिक सक्रिय होंगी, जिससे विदेशों में रह रहे भारतीयों को भी सुरक्षा का अनुभव होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप डिजिटल सुरक्षा के ढांचे को मजबूत करेगा। पीठ ने केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वे एक ऐसी केंद्रीकृत प्रणाली विकसित करें जहां पीड़ित अपनी शिकायत दर्ज करा सकें और कम से कम समय में उनकी राशि को रिकवर किया जा सके। न्यायालय ने पुलिस को डिजिटल साक्ष्य जुटाने के लिए विशेष प्रशिक्षण देने की भी वकालत की है।
अंत में, सर्वोच्च न्यायालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान वीडियो कॉल से न डरें और यह याद रखें कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती है। आईसीएम24 (ICN24) अपने पाठकों को सलाह देता है कि वे सतर्क रहें और भारत में अपने वृद्ध माता-पिता को इन स्कैम्स के बारे में जागरूक करें, क्योंकि वे अक्सर इन ठगों का आसान शिकार बन जाते हैं।
संबंधित ख़बरें

ब्रेकिंगब्रेकिंग
छत्तीसगढ़ कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक शुरू: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ले सकते हैं बड़े फैसले
रायपुर के महानदी भवन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक शुरू हो गई है, जिसमें राज्य के विकास से जुड़े कई बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं।
5 अग॰ 2026, 06:37 pm

ब्रेकिंगब्रेकिंग
जौनपुर: सई नदी में 19 वर्षीय युवती ने लगाई छलांग, बरगुदर पुल पर साइकिल और चप्पल मिलने से सनसनी
जौनपुर के सिकरारा में सई नदी के बरगुदर पुल से एक युवती ने छलांग लगा दी। मौके पर युवती की साइकिल और चप्पल मिलने के बाद पुलिस और गोताखोर तलाश में जुटे हैं।
5 अग॰ 2026, 05:39 pm

ब्रेकिंगब्रेकिंग
कोयला मंत्रालय ने छह कोयला ब्लॉकों की नीलामी की, सालाना ₹1,984 करोड़ का राजस्व मिलने का अनुमान
भारत के कोयला मंत्रालय ने छह कोयला खदानों की सफल नीलामी की है, जिससे सरकारी खजाने में सालाना लगभग 1,984 करोड़ रुपये आने की उम्मीद है।
5 अग॰ 2026, 05:37 pm

