राजनीति
हाइपरसोनिक मिसाइल: युद्ध के मैदान में भारत का नया 'ब्रह्मास्त्र', जो दुश्मन के रडार को कर देगा विफल
ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 06:30 am
हाइपरसोनिक तकनीक ने वैश्विक सैन्य संतुलन को बदल दिया है। भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो पलक झपकते ही दुश्मन के रडार को चकमा देने की क्षमता रखते हैं।
दुनियाभर में सैन्य तकनीक और युद्ध की रणनीतियां बेहद तेजी से बदल रही हैं। अब भविष्य के संघर्षों की पटकथा केवल थल या सामान्य वायुमंडल में नहीं, बल्कि हाइपरसोनिक हथियारों (Hypersonic Weapons) के दम पर लिखी जा रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हाइपरसोनिक मिसाइलें आधुनिक युद्ध कौशल का 'ब्रह्मास्त्र' हैं, जो न केवल ध्वनि की गति से पांच गुना तेज चलती हैं, बल्कि दुश्मन की रक्षा प्रणालियों को पूरी तरह से अप्रासंगिक बना देती हैं।
हाल के वर्षों में भारत ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के माध्यम से अपनी हाइपरसोनिक क्षमताओं का सफल प्रदर्शन किया है। यह उपलब्धि भारत को अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के विशिष्ट क्लब में खड़ा करती है। हाइपरसोनिक मिसाइलें दो प्रकार की होती हैं: हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (HCM)। इनकी सबसे बड़ी विशेषता इनकी गति और मार्ग बदलने की क्षमता है। जहां पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलें एक निर्धारित पथ (Parabolic path) पर चलती हैं, वहीं हाइपरसोनिक हथियार उड़ान के दौरान अपनी दिशा बदल सकते हैं, जिससे रडार के लिए इन्हें ट्रैक करना और इंटरसेप्ट करना लगभग असंभव हो जाता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह तकनीकी प्रगति गर्व का विषय है, क्योंकि यह न केवल भारत की सुरक्षा को पुख्ता करती है, बल्कि हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में भी सहायक है। ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग, विशेष रूप से 'क्वाड' (QUAD) ढांचे के तहत, हाइपरसोनिक तकनीक के क्षेत्र में नए साझा अनुसंधान की संभावनाएं पैदा करता है। भारत की बढ़ती सैन्य ताकत ऑस्ट्रेलिया के साथ उसके रणनीतिक संबंधों को और अधिक मजबूती प्रदान करती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाइपरसोनिक मिसाइलें रडार की पकड़ में आने से पहले ही अपने लक्ष्य को भेदने की क्षमता रखती हैं। इनकी रफ्तार इतनी अधिक होती है कि दुश्मन के पास प्रतिक्रिया देने के लिए कुछ ही सेकंड का समय बचता है। भारत की स्वदेशी अग्नि (Agni) श्रृंखला और ब्रह्मोस-2 (BrahMos-II) जैसी परियोजनाओं पर काम जारी है, जो भविष्य में भारत को एक अपराजेय सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित करेंगी।
निष्कर्षतः, हाइपरसोनिक युग की शुरुआत ने पारंपरिक रक्षा प्रणालियों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश की है। भारत अपनी 'आत्मनिर्भर भारत' नीति के तहत इन तकनीकों में निवेश बढ़ा रहा है। यह न केवल पड़ोसी देशों के साथ सीमाओं पर शांति बनाए रखने के लिए जरूरी है, बल्कि वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार सैन्य महाशक्ति के रूप में भारत की स्थिति को भी सुदृढ़ करता है।
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