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सीजफायर के बावजूद इजरायली सेना का रुख कड़ा; हिजबुल्लाह के 'खतरों' को खत्म करने की दी चेतावनी
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 06:27 pm
इजरायल रक्षा बलों (IDF) ने स्पष्ट किया है कि वे दक्षिणी लेबनान में अपनी कार्रवाइयां जारी रखेंगे ताकि हिजबुल्लाह द्वारा किसी भी प्रकार के उल्लंघन का जवाब दिया जा सके।
इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच हुए संघर्ष विराम के बावजूद, मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। इजरायल रक्षा बलों (IDF) ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि वे दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य गतिविधियों को पूरी तरह बंद नहीं करेंगे। IDF के अनुसार, उनका उद्देश्य क्षेत्र में 'तत्काल खतरों' को खत्म करना और हिजबुल्लाह की ओर से होने वाले किसी भी समझौते के उल्लंघन का कड़ा जवाब देना है।
तेल अवीव से प्राप्त जानकारी के अनुसार, IDF के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रीन ने एक वीडियो वक्तव्य में कहा कि इजरायली सेना सतर्क है और अपनी रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं को बनाए हुए है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यद्यपि एक संघर्ष विराम समझौता लागू है, लेकिन इजरायल अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। डेफ्रीन ने स्पष्ट किया कि यदि हिजबुल्लाह की ओर से कोई भी संदिग्ध गतिविधि देखी जाती है, तो सेना त्वरित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से लेबनान और इजरायल के बीच शांति बहाली की उम्मीद कर रहा था। हालांकि, जमीनी स्तर पर स्थिति जटिल बनी हुई है। IDF का दावा है कि वे केवल उन बुनियादी ढांचों और ठिकानों को लक्षित कर रहे हैं जिनसे इजरायल की उत्तरी सीमा पर सीधा खतरा पैदा हो सकता है। इस बीच, लेबनान के नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने इस रुख पर चिंता व्यक्त की है, क्योंकि इससे संघर्ष विराम के पूरी तरह विफल होने का डर बना रहता है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि मध्य पूर्व में अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और आर्थिक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में एक बड़ी संख्या में भारतीय और लेबनानी प्रवासी रहते हैं, जो अपने मूल देशों में शांति की कामना कर रहे हैं। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक, जिनके व्यापार या रिश्तेदार मध्य पूर्व में हैं, इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि IDF का यह रुख केवल सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक संदेश भी है। इजरायल यह स्पष्ट करना चाहता है कि वह अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए किसी भी समझौते की सीमाओं से परे जाकर कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या हिजबुल्लाह इस पर कोई जवाबी प्रतिक्रिया देता है या अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ इस तनाव को कम करने में सफल हो पाते हैं। फिलहाल, क्षेत्र में शांति की डोर काफी नाजुक नजर आ रही है।
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