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भारत बना दुनिया का चौथा सबसे समान समाज: विश्व बैंक के ताजा आंकड़ों ने रचा नया इतिहास
ICN24 Newsroom 1 अग॰ 2026, 11:36 am
विश्व बैंक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत 25.5 के जिनी इंडेक्स के साथ दुनिया का चौथा सबसे समान समाज बन गया है, जो देश की आर्थिक यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
नई दिल्ली/कैनबरा: भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति के सफर में एक ऐसी उपलब्धि सामने आई है, जो राजनीतिक मतभेदों से परे हटकर पूरे राष्ट्र के लिए जश्न मनाने का अवसर है। विश्व बैंक द्वारा जारी किए गए नवीनतम उपभोग-आधारित 'जिनी इंडेक्स' (Gini Index) के आंकड़ों के अनुसार, भारत अब दुनिया का चौथा सबसे समान समाज बन गया है। यह उपलब्धि भारत के लिए न केवल सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर देश की बदलती छवि का भी प्रमाण है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का जिनी इंडेक्स स्कोर 25.5 दर्ज किया गया है। जिनी इंडेक्स आय या उपभोग के वितरण को मापने का एक पैमाना है, जहां '0' पूर्ण समानता को दर्शाता है और '100' पूर्ण असमानता को। 25.5 का स्कोर यह दर्शाता है कि भारत में संसाधनों और उपभोग का वितरण कई विकसित और विकासशील देशों की तुलना में कहीं अधिक संतुलित है। इस सूची में भारत अब केवल तीन अन्य देशों से पीछे है, जो इसे वैश्विक मंच पर एक अग्रणी स्थान प्रदान करता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय (Indian-Australian community) के लिए यह खबर विशेष गर्व का विषय है। अक्सर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत को अत्यधिक गरीबी और गहरी असमानता वाले देश के रूप में चित्रित किया जाता रहा है। हालांकि, विश्व बैंक के ये नवीनतम आंकड़े उस पुराने नैरेटिव को चुनौती देते हैं। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में बसे प्रवासी भारतीय, जो भारत की विकास गाथा पर पैनी नजर रखते हैं, इस बदलाव को भारत की समावेशी विकास नीतियों की सफलता के रूप में देख रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफलता के पीछे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) जैसी नीतियों का बड़ा हाथ है। बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के प्रयासों ने समाज के निचले पायदान पर खड़े लोगों की उपभोग क्षमता को बढ़ाया है। जब उपभोग में समानता आती है, तो इसका सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर पड़ता है। विश्व बैंक का यह डेटा इसी जमीनी हकीकत को बयां कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी राष्ट्र की यात्रा में कुछ ऐसे क्षण आते हैं जब दलीय राजनीति को किनारे रखकर राष्ट्रीय गौरव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। भारत का दुनिया के सबसे समान समाजों में शुमार होना निस्संदेह ऐसा ही एक क्षण है। यह आंकड़ा न केवल घरेलू नीतियों की सफलता को दर्शाता है, बल्कि विदेशी निवेशकों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है कि भारत एक स्थिर और संतुलित आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है।
आने वाले समय में, भारत के लिए चुनौती इस स्तर को बनाए रखने और इसे और बेहतर करने की होगी। जैसा कि भारत पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंचे। फिलहाल, विश्व बैंक की यह रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि 'सबका साथ, सबका विकास' का नारा केवल एक नारा नहीं, बल्कि धरातल पर उतरता हुआ सच है।
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