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भारतीय कंपनियों का अमेरिका में बड़ा निवेश: पांच वर्षों में निवेश किए 15.9 बिलियन डॉलर
ICN24 Newsroom 23 जुल॰ 2026, 12:35 am

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2022 से 2026 के बीच भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 15.9 अरब डॉलर का निवेश किया है।
भारतीय कॉर्पोरेट जगत के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होते हुए, भारत की निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने पिछले पांच वित्तीय वर्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 15.9 बिलियन डॉलर का निवेश किया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा हाल ही में संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, यह निवेश वित्त वर्ष 2022 से शुरू होकर वित्त वर्ष 2026 की अनुमानित अवधि तक फैला हुआ है। यह डेटा न केवल भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते आर्थिक संबंधों को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) की बढ़ती साख को भी प्रमाणित करता है।
संसद में दिए गए सरकारी बयान के अनुसार, भारतीय निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा वित्तीय सेवाओं, बीमा और व्यापार से संबंधित क्षेत्रों में गया है। इसके अलावा, आईटी सेवाएं, विनिर्माण और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में भी भारतीय फर्मों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (ODI) की यह प्रवृत्ति अमेरिका के साथ द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश न केवल अमेरिकी बाजार में रोजगार के अवसर पैदा कर रहा है, बल्कि भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और बाजार तक पहुंच भी प्रदान कर रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। जिस तरह अमेरिका में भारतीय निवेश की गति बढ़ी है, ठीक वैसी ही प्रवृत्ति ऑस्ट्रेलिया में भी देखी जा रही है। भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ECTA) के बाद, कई भारतीय कंपनियां सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में अपने कार्यालयों का विस्तार कर रही हैं। टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो जैसी आईटी दिग्गज कंपनियों के साथ-साथ टाटा समूह और अदाणी जैसे बड़े औद्योगिक घरानों ने ऑस्ट्रेलिया के ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में अरबों डॉलर का निवेश किया है। अमेरिका में किया गया यह हालिया निवेश भारतीय कंपनियों की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वे पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जड़ें मजबूत कर रहे हैं।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि भारतीय फर्मों ने केवल बड़े अधिग्रहणों पर ध्यान केंद्रित नहीं किया है, बल्कि 'ग्रीनफील्ड' परियोजनाओं (शून्य से शुरू किए गए प्रोजेक्ट) में भी निवेश किया है। इससे अमेरिका के विभिन्न राज्यों में हजारों स्थानीय नौकरियां पैदा हुई हैं, जिससे भारतीय मूल के पेशेवरों के लिए नए अवसर खुले हैं। आर्थिक विश्लेषकों का तर्क है कि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों में भारतीय निवेश बढ़ने से भारत की सॉफ्ट पावर के साथ-साथ आर्थिक प्रभाव में भी वृद्धि होती है। यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में भारत की भूमिका को एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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