खेल
ईरान के फुटबॉल प्रशंसकों पर लगा प्रतिबंध: स्टेडियमों में 'क्रांति-पूर्व' के झंडों पर कोर्ट ने बरकरार रखी रोक
ICN24 Newsroom 16 जून 2026, 08:00 pm
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के मैचों के दौरान ईरान के प्रशंसक अब पुराने 'शेर और सूरज' वाले झंडे नहीं ले जा सकेंगे। कोर्ट ने फीफा के इस प्रतिबंध को सही ठहराया है।
ईरान के फुटबॉल प्रशंसकों के लिए एक बड़ा झटका देते हुए, एक अदालत ने फीफा (FIFA) के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें स्टेडियमों के भीतर क्रांति-पूर्व (Pre-revolution) के ईरानी झंडे ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह फैसला फीफा विश्व कप 2026 के क्वालीफायर मैचों के मद्देनजर आया है, जिससे खेल के मैदानों में राजनीतिक प्रतीकों के इस्तेमाल पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।
यह कानूनी आदेश सोफी स्टेडियम (SoFi Stadium) में ईरान और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले मुकाबले से ठीक पहले आया। फीफा के नियमों के अनुसार, खेल के दौरान किसी भी प्रकार के राजनीतिक, धार्मिक या व्यक्तिगत संदेशों को प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं है। अदालत ने माना कि 'शेर और सूरज' (Lion and Sun) वाला पुराना झंडा, जो 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले ईरान का आधिकारिक ध्वज था, वर्तमान में एक राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले बड़े ईरानी और भारतीय समुदायों के लिए यह खबर काफी महत्वपूर्ण है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में अक्सर खेल आयोजनों के दौरान प्रवासी समुदाय अपनी सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान को प्रदर्शित करते रहे हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई खेल प्रशंसक, जो अक्सर तिरंगे के साथ स्टेडियमों की शोभा बढ़ाते हैं, इस तरह के प्रतिबंधों को खेल की तटस्थता बनाए रखने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, अभिव्यक्ति की आजादी के समर्थकों का तर्क है कि यह प्रशंसकों की अपनी विरासत से जुड़ने की कोशिश है।
फीफा ने अपने बचाव में कहा कि फुटबॉल के मैदानों को शांतिपूर्ण और राजनीति से मुक्त रखना उनकी प्राथमिकता है। संघ का तर्क है कि ऐसे प्रतीकों से स्टेडियम के भीतर तनाव पैदा हो सकता है और दर्शकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि खेल निकायों के पास अपने कार्यक्रमों को सुरक्षित और गैर-विवादास्पद बनाने के लिए नियम लागू करने का अधिकार है।
ईरानी प्रशंसकों के एक समूह ने इस फैसले पर निराशा व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह झंडा केवल एक राजनीतिक प्रतीक नहीं, बल्कि उनके इतिहास और पहचान का हिस्सा है। दूसरी ओर, सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कड़े कदम अंतरराष्ट्रीय मैचों के दौरान अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक हैं। आने वाले समय में विश्व कप के अन्य मैचों में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहने की उम्मीद है, ताकि किसी भी प्रतिबंधित सामग्री को अंदर जाने से रोका जा सके।
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