राजनीति
कारगिल से गलवान तक: ज़ोजिला टनल कैसे बदलेगी चीन और पाकिस्तान के खिलाफ भारत का सैन्य समीकरण?
ICN24 Newsroom 10 जून 2026, 02:30 pm

हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों में बन रही ज़ोजिला सुरंग भारत के लिए रणनीतिक गेम-चेंजर साबित होगी, जो लद्दाख को हर मौसम में कश्मीर से जोड़े रखेगी।
भारत ने हिमालय के अत्यंत कठिन इलाकों में ज़ोजिला सुरंग (Zojila Tunnel) के निर्माण में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। 13 किलोमीटर से अधिक लंबी यह सुरंग न केवल इंजीनियरिंग का एक चमत्कार है, बल्कि यह लद्दाख क्षेत्र में भारत की सैन्य पकड़ को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करने वाली है। समुद्र तल से 11,575 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह सुरंग कश्मीर घाटी और लद्दाख के बीच साल भर संपर्क बनाए रखेगी, जो अब तक सर्दियों के भारी हिमपात के कारण महीनों तक कटा रहता था।
ऐतिहासिक रूप से, 1948 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और 1999 के कारगिल संघर्ष के दौरान ज़ोजिला दर्रा एक महत्वपूर्ण युद्धक्षेत्र रहा है। सर्दियों के दौरान इस मार्ग के बंद होने से सेना की रसद और आवाजाही में भारी बाधा आती थी। हालांकि, 2020 में गलवान घाटी में चीन के साथ हुए सैन्य गतिरोध के बाद, भारत सरकार ने इस बुनियादी ढांचे के काम में तेजी लाने का निर्णय लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुरंग तिब्बत में चीन द्वारा विकसित किए गए व्यापक बुनियादी ढांचे के जवाब में भारत का सबसे मजबूत कदम है।
सैन्य दृष्टि से देखें तो यह सुरंग टैंकों, भारी तोपखाने और हजारों सैनिकों की त्वरित तैनाती को संभव बनाएगी। वर्तमान में, जोजिला दर्रे को पार करने में तीन घंटे से अधिक का समय लगता है, लेकिन सुरंग के पूर्ण होने के बाद यह यात्रा मात्र 15 मिनट में सिमट जाएगी। यह समय की बचत युद्ध जैसी आपातकालीन स्थितियों में निर्णायक साबित हो सकती है। यह बुनियादी ढांचा न केवल पाकिस्तान के खिलाफ बल्कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए भी आवश्यक है।
रणनीतिक लाभ के साथ-साथ, इस परियोजना का मानवीय और आर्थिक पहलू भी महत्वपूर्ण है। लद्दाख के स्थानीय निवासी, जो सर्दियों के छह महीनों तक देश के बाकी हिस्सों से अलग-थलग रहते थे, अब बेहतर चिकित्सा सुविधाओं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्राप्त कर सकेंगे। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए, जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा विकास पर बारीकी से नजर रखते हैं, यह परियोजना 'आत्मनिर्भर भारत' और सीमा प्रबंधन की नई दिशा का प्रतीक है।
भारत की यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर सीमा विवादों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। ज़ोजिला सुरंग का निर्माण पूरा होना इस बात का प्रमाण है कि नई दिल्ली ने अपनी रक्षात्मक खामियों को पहचान लिया है और अब वह अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक समाधानों में निवेश कर रही है। यह परियोजना निश्चित रूप से दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत की स्थिति को और अधिक प्रभावशाली बनाएगी।
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