राजनीति
मोदी-मैक्रों मुलाकात: व्यापार से एआई तक, भारत और फ्रांस ने तय किए नए लक्ष्य
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 12:01 pm

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई बैठक में रक्षा, एआई और द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करने के लिए नए रोडमैप पर सहमति बनी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठक ने भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। शनिवार को नीस पहुंचने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यूरोपीय यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य पर चर्चा की। इस मुलाकात का मुख्य केंद्र व्यापार, उभरती प्रौद्योगिकियां और विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रहा। दोनों नेताओं ने यह स्पष्ट किया कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत और फ्रांस एक-दूसरे के सबसे भरोसेमंद साझेदार बने रहेंगे।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों ने डिजिटल संप्रभुता और एआई के नैतिक उपयोग को लेकर एक साझा दृष्टिकोण अपनाया है। भारत, जो वर्तमान में एआई के क्षेत्र में अपनी वैश्विक भूमिका बढ़ा रहा है, फ्रांस के साथ मिलकर इस तकनीक के औद्योगिक और सैन्य अनुप्रयोगों पर सहयोग करेगा। इसके अलावा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर भी गहन विचार-विमर्श हुआ। यह क्षेत्र न केवल भारत और फ्रांस के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया जैसे क्वाड भागीदारों के लिए भी रणनीतिक महत्व रखता है।
व्यापार के मोर्चे पर, दोनों देशों ने आपसी निवेश को बढ़ावा देने और आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला बनाने पर जोर दिया। वर्तमान में कई फ्रांसीसी कंपनियां भारत के 'मेक इन इंडिया' अभियान में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं, और आने वाले समय में रक्षा विनिर्माण में और अधिक संयुक्त उद्यमों की संभावना जताई गई है। प्रधानमंत्री ने भारतीय प्रवासियों और पेशेवरों के लिए फ्रांस में बढ़ते अवसरों का भी स्वागत किया, जो वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा काफी व्यस्त रहने वाला है। नीस के बाद, वे 14 से 16 जून तक स्लोवाकिया की यात्रा पर रहेंगे, जहां मध्य यूरोप के साथ भारत के संबंधों को मजबूत किया जाएगा। इसके उपरांत, वे 16-17 जून को इवियन-लेस-बैंस में आयोजित होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पुनः फ्रांस लौटेंगे। इस यात्रा का समापन पेरिस में महत्वपूर्ण बैठकों के साथ होगा।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए, यह कूटनीतिक सक्रियता काफी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया, भारत और फ्रांस के बीच त्रिपक्षीय सहयोग (Trilateral Cooperation) तेजी से विकसित हो रहा है, जिसका उद्देश्य एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुनिश्चित करना है। जब भारत अपने प्रमुख यूरोपीय साझेदारों के साथ रक्षा और तकनीक में सहयोग बढ़ाता है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव कैनबरा और नई दिल्ली के बीच के रक्षा संबंधों पर भी पड़ता है।
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