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मप्र सिविल सेवा नियम 2026: गंभीर अपराध में दोषी पाए जाने वाले सरकारी कर्मचारी होंगे बर्खास्त

ICN24 Newsroom 5 जून 2026, 08:00 pm
मप्र सिविल सेवा नियम 2026: गंभीर अपराध में दोषी पाए जाने वाले सरकारी कर्मचारी होंगे बर्खास्त

मध्य प्रदेश सरकार ने सिविल सेवा नियमों में बड़ा संशोधन किया है, जिसके तहत गंभीर अपराधों में संलिप्त पाए जाने वाले सरकारी कर्मचारियों को अब सीधे सेवा से बर्खास्त किया जाएगा।

मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक कड़ा कदम उठाया है। 'मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम' में व्यापक संशोधन करते हुए अब 'मप्र सिविल सेवा नियम 2026' के प्रारूप को मंजूरी की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। इन नए प्रावधानों के तहत, यदि कोई शासकीय सेवक किसी गंभीर अपराध या नैतिक पतन के मामले में दोषी पाया जाता है, तो उसे अनिवार्य रूप से नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा। सरकार के इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य सरकारी तंत्र से भ्रष्टाचार और आपराधिक गतिविधियों को जड़ से समाप्त करना है। अब तक के नियमों में विभागीय जांच और लंबी कानूनी प्रक्रियाओं के कारण कई बार आरोपी कर्मचारियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई नहीं हो पाती थी। लेकिन संशोधित नियमों के लागू होने के बाद, अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने या गंभीर दुराचार की पुष्टि होने पर संबंधित कर्मचारी की सेवा समाप्ति का मार्ग प्रशस्त हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियम न केवल राज्य प्रशासन में जवाबदेही तय करेंगे, बल्कि आम जनता का सरकारी संस्थानों पर भरोसा भी बढ़ाएंगे। इन संशोधनों में उन अपराधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है जिन्हें 'गंभीर' की श्रेणी में रखा जाएगा। इसमें वित्तीय धोखाधड़ी, महिलाओं के विरुद्ध अपराध, और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों जैसे संगीन मामले शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से मध्य प्रदेश मूल के प्रवासियों के लिए यह समाचार महत्वपूर्ण है। प्रवासी समुदाय अक्सर भारत में सुशासन और प्रशासनिक सुधारों पर पैनी नजर रखता है। ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों में, जहां लोक सेवकों के लिए आचार संहिता अत्यंत सख्त है, मध्य प्रदेश सरकार का यह निर्णय उसी दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। प्रवासी भारतीयों का मानना है कि ऐसे कड़े नियमों से मध्य प्रदेश में निवेश का माहौल बेहतर होगा और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। विपक्ष और कर्मचारी संगठनों की ओर से इस पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जहां कुछ लोग इसे प्रशासन में शुद्धिकरण मान रहे हैं, वहीं कुछ का तर्क है कि इन नियमों का राजनीतिक दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया जाएगा और किसी भी निर्दोष कर्मचारी को प्रताड़ित नहीं किया जाएगा। आगामी विधानसभा सत्र में इन नियमों के विस्तृत ढांचे को आधिकारिक रूप से पटल पर रखे जाने की संभावना है।
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