राजनीति
नीति आयोग की बैठक: पहली बार जुटे सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्री, पीएम मोदी ने AI और जल सुरक्षा पर दिया जोर
ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 09:00 pm
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की बैठक में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। पीएम ने एआई के खतरों और अल-नीनो से निपटने की रणनीति पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नई दिल्ली में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक ऐतिहासिक रही। संस्थान के 11 साल के इतिहास में यह पहला अवसर था जब देश के सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्री एक साथ इस चर्चा में शामिल हुए। यह बैठक 'विकसित भारत @ 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने उभरती प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर विस्तार से बात की। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को एआई द्वारा पेश किए गए अवसरों और इसके कारण पैदा होने वाले सामाजिक खतरों के बीच एक सूक्ष्म संतुलन बनाना होगा। पीएम ने तकनीक के दुरुपयोग, साइबर धोखाधड़ी और डीपफेक जैसे मुद्दों पर चिंता व्यक्त की और राज्यों से इन चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहने का आग्रह किया।
पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के मोर्चे पर, पीएम मोदी ने अल-नीनो (El Nino) के संभावित प्रभावों के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच जल संरक्षण और जल सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने राज्यों से जल संचयन के आधुनिक और पारंपरिक तरीकों को अपनाने की अपील की ताकि कृषि और आम जनजीवन पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम किया जा सके। प्रधानमंत्री ने नशीली दवाओं (ड्रग्स) के बढ़ते खतरे पर भी प्रहार किया और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बताया।
राजनीतिक और नीतिगत मोर्चे पर, बैठक में कुछ तीखे सुर भी सुनाई दिए। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने चिकित्सा प्रवेश परीक्षा 'नीट' (NEET) का कड़ा विरोध किया। उन्होंने परीक्षा में कथित अनियमितताओं और संघीय ढांचे पर इसके प्रभाव का हवाला देते हुए राज्य के छात्रों के हितों की रक्षा करने की मांग की। तमिलनाडु लंबे समय से नीट से छूट की मांग कर रहा है, और मुख्यमंत्री ने इस मंच का उपयोग अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी भारतीयों (Diaspora) के लिए यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नीति आयोग के निर्णय सीधे तौर पर भारत की व्यापार नीति, तकनीक निवेश और जल प्रबंधन को प्रभावित करते हैं। चूंकि कई अनिवासी भारतीय (NRIs) भारत में तकनीकी स्टार्टअप और कृषि विकास में निवेश करते हैं, इसलिए एआई और जलवायु नीतियों पर केंद्र का रुख उनके हितों के लिए प्रासंगिक है।
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