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जम्मू में एकीकृत नशामुक्ति और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं: केंद्र सरकार

ICN24 Newsroom 31 जुल॰ 2026, 01:35 pm
जम्मू में एकीकृत नशामुक्ति और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं: केंद्र सरकार

केंद्र सरकार ने राज्यसभा में स्पष्ट किया कि जम्मू क्षेत्र में एकीकृत नशामुक्ति और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की अभी कोई योजना नहीं है।

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के जम्मू क्षेत्र में वर्तमान में एकीकृत नशामुक्ति और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न का उत्तर देते हुए सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने यह जानकारी दी। यह जवाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद और जम्मू-कश्मीर भाजपा के अध्यक्ष सत शर्मा द्वारा पूछे गए एक अतारांकित प्रश्न के संदर्भ में आया है। सत शर्मा ने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर में नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने और पुनर्वास सुविधाओं में सुधार की योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी थी। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया था कि क्या सरकार जम्मू क्षेत्र में ऐसे केंद्र स्थापित करने जा रही है जो नशामुक्ति के साथ-साथ युवाओं को कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान करें, ताकि वे मुख्यधारा में वापस लौट सकें। सदन को जानकारी देते हुए मंत्री बी.एल. वर्मा ने केंद्र शासित प्रदेश में वर्तमान में उपलब्ध बुनियादी ढांचे का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि 'नशा मुक्त भारत अभियान' और 'नशीली दवाओं की मांग में कमी के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना' (NAPDDR) के तहत जम्मू-कश्मीर में पहले से ही कई सुविधाएं संचालित हैं। वर्तमान में राज्य में एक एकीकृत पुनर्वास केंद्र (IRCA), छह जिला नशामुक्ति केंद्र (DDAC), दो समुदाय आधारित सहकर्मी हस्तक्षेप (CPLI) केंद्र, तीन आउटरीच और ड्रॉप-इन केंद्र (ODIC) और 21 एडिक्शन ट्रीटमेंट सुविधाएं (ATF) कार्य कर रही हैं। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि नए नशामुक्ति केंद्रों की स्थापना और उनकी निगरानी एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जो आवश्यकता और उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करती है। मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के उपायों पर सांसद के सवाल का जवाब देते हुए सरकार ने 'नार्को कोआर्डिनेशन सेंटर' (NCORD) तंत्र की भूमिका पर प्रकाश डाला। गृह मंत्रालय द्वारा स्थापित इस चार-स्तरीय तंत्र का उद्देश्य विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2018 से जम्मू-कश्मीर में ड्रग तस्करी के परिदृश्य की समीक्षा करने और प्रवर्तन कार्रवाई की निगरानी के लिए 17 राज्य-स्तरीय और 836 जिला-स्तरीय NCORD समिति की बैठकें आयोजित की गई हैं। केंद्र सरकार ने जोर देकर कहा कि NCORD पोर्टल देश भर में नशा विरोधी पहलों के लिए एक केंद्रीकृत ज्ञान प्रबंधन और सूचना साझाकरण मंच के रूप में कार्य कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर मूल के प्रवासियों के लिए यह मुद्दा अत्यंत संवेदनशील है। प्रवासी समुदाय अक्सर अपनी मातृभूमि में युवाओं के भविष्य और वहां सामाजिक ढांचे पर नशीली दवाओं के प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त करता रहा है। सत शर्मा ने संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि पुनर्वास केवल उपचार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास को भी जोड़ा जाना चाहिए। हालांकि वर्तमान में नए एकीकृत केंद्रों का प्रस्ताव नहीं है, लेकिन मौजूदा बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के सरकार के आश्वासन को एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
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