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पॉलीन हेंसन की मांग: ऑस्ट्रेलिया में विदेशी छात्रों के शरण (Asylum) मांगने और वीजा नियमों के दुरुपयोग पर लगे लगाम
ICN24 Admin 9 जून 2026, 10:39 am

वन नेशन की नेता पॉलीन हेंसन ने ऑस्ट्रेलिया की आव्रजन प्रणाली में सुधार की मांग करते हुए विदेशी छात्रों द्वारा शरण के दुरुपयोग और 'कोर्स-हॉपिंग' पर कड़ी आपत्ति जताई है।
वन नेशन पार्टी की नेता और सीनेटर पॉलीन हेंसन ने ऑस्ट्रेलिया की आव्रजन प्रणाली में व्याप्त विसंगतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए एक नए नीतिगत बदलाव की मांग की है। हेंसन का प्रस्ताव है कि विदेशी छात्रों को ऑस्ट्रेलिया में आगे की पढ़ाई के लिए आवेदन करने से पहले अपने गृह देश वापस लौटना अनिवार्य होना चाहिए। उनके अनुसार, यह कदम आव्रजन प्रणाली के दुरुपयोग को रोकने और उन गैर-नागरिकों के बैकलॉग को कम करने के लिए आवश्यक है जो वर्तमान में देश में अवैध रूप से रह रहे हैं।
हेंसन ने ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे 'विदेशी छात्रों से मिलने वाले आसान पैसे' के आदी हो चुके हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों को इस पूरी व्यवस्था के दुरुपयोग में भागीदार बताया। सीनेटर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया में वर्तमान में रिकॉर्ड 2.6 मिलियन अस्थायी वीजा धारक मौजूद हैं, जो देश के संसाधनों और आवास व्यवस्था पर भारी दबाव डाल रहे हैं। उनके अनुसार, इनमें से कई लोग उन घरों और सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं जो प्राथमिकता के आधार पर ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के लिए होने चाहिए।
सीनेटर हेंसन ने विशेष रूप से 'कोर्स-हॉपिंग' (Course-hopping) की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विदेशी छात्र शिक्षा के इरादे से नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया की उच्च मजदूरी और आर्थिक लाभों तक पहुंचने के इरादे से आते हैं। प्रक्रिया को समझाते हुए उन्होंने कहा कि छात्र पहले स्टूडेंट वीजा लेते हैं, लेकिन जल्द ही पढ़ाई छोड़ देते हैं और फिर फर्जी स्कूलों या छोटे पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन कर देते हैं। इस दौरान वे 'ब्रिजिंग वीजा' (Bridging Visa) पर बने रहते हैं, जो उन्हें ऑस्ट्रेलिया में काम करने और रहने की अनुमति देता है।
आंकड़ों के अनुसार, ये ब्रिजिंग वीजा औसतन 200 दिनों तक चलते हैं। यदि छात्रों का नया वीजा आवेदन खारिज हो जाता है, तो वे इसके खिलाफ अपील कर देते हैं। हेंसन ने बताया कि अपील की प्रक्रिया में औसतन 64 सप्ताह का समय और लग जाता है, जिस दौरान छात्र कानूनी रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह सकते हैं। इतना ही नहीं, कई छात्र बिना किसी ठोस आधार के शरण (Asylum) का दावा कर देते हैं। शरण आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने में औसतन तीन साल का समय लगता है, और यदि वह भी खारिज हो जाए, तो फिर से अपील कर समय बढ़ाया जाता है।
हेंसन ने चिंता व्यक्त की कि पिछले तीन वर्षों में ब्रिजिंग वीजा पर रहने वाले विदेशी छात्रों की संख्या 13,000 से बढ़कर 1,07,000 से अधिक हो गई है। उन्होंने सेंट्रल क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी (CQU) का उदाहरण देते हुए कहा कि सिडनी में उनके कैंपस होने का एकमात्र उद्देश्य विदेशी छात्रों से मुनाफा कमाना है, जबकि 2023 में वहां विदेशी छात्रों के बीच प्रथम वर्ष में पढ़ाई छोड़ने की दर 57.2% दर्ज की गई थी।
वन नेशन की प्रस्तावित नीति के तहत, जो छात्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं, उन्हें ऑस्ट्रेलिया में रहने या काम करने के लिए ब्रिजिंग वीजा नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, उन्हें ऑस्ट्रेलियन रिव्यू ट्रिब्यूनल (ART) में अपील करने का अधिकार भी नहीं होगा। हेंसन ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालयों को अपनी इस 'लत' को छोड़ना होगा और ऑस्ट्रेलियाई छात्रों की शिक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।
यह बयान ऑस्ट्रेलिया में आवास संकट और बढ़ती जनसंख्या के बीच आया है, जहां आव्रजन नीति एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। हेंसन का मानना है कि यदि छात्रों को आवेदन से पहले अपने देश वापस जाने के लिए मजबूर किया जाता है, तो इससे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और केवल वास्तविक छात्र ही ऑस्ट्रेलिया आएंगे।
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