राजनीति
पुणे में कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन: सोनम वांगचुक ने जारी किया शिक्षा घोषणापत्र, मराठा साम्राज्य के इतिहास को लेकर उठी मांग
ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 07:30 pm
पुणे में कॉकरोच जनता पार्टी ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और NCERT किताबों में मराठा साम्राज्य का नक्शा पुन: शामिल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
महाराष्ट्र की सांस्कृतिक और शैक्षिक राजधानी पुणे में गुरुवार को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (SPPU) के परिसर में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व पार्टी के संस्थापक अभिजीत ने किया, जिसमें प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और लद्दाख के शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक भी शामिल हुए। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य देश की शिक्षा प्रणाली में व्याप्त विसंगतियों को दूर करना और इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में क्षेत्रीय गौरव को उचित स्थान दिलाना था।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में से एक NCERT की पाठ्यपुस्तकों में मराठा साम्राज्य के मानचित्र को फिर से शामिल करना है। अभिजीत ने कहा कि मराठा इतिहास भारतीय शौर्य का अभिन्न अंग है और नई पीढ़ी को इसकी विस्तार से जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान पाठ्यक्रम में ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है या उन्हें कम करके दिखाया गया है, जिसे तुरंत सुधारने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर सोनम वांगचुक ने CJP का 'शिक्षा घोषणापत्र' (Education Manifesto) जारी किया। वांगचुक ने देश में बार-बार हो रहे पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छात्र अपना कीमती समय और संसाधन इन परीक्षाओं में लगाते हैं, लेकिन पारदर्शिता की कमी के कारण उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है। घोषणापत्र में परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय करने, समय पर परिणाम घोषित करने और प्रवेश प्रक्रियाओं में पूरी तरह से पारदर्शिता लाने के रोडमैप पर जोर दिया गया है।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की। वक्ताओं ने तर्क दिया कि हाल के वर्षों में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों ने छात्रों के विश्वास को तोड़ा है। उन्होंने मांग की कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से डिजिटल और सुरक्षित बनाया जाए ताकि भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश न रहे।
यह घटनाक्रम ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से महाराष्ट्र मूल के प्रवासियों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। सिडनी और मेलबर्न में रहने वाले कई भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई छात्र और पेशेवर भारत की शिक्षा नीतियों में होने वाले इन बदलावों पर करीब से नजर रखते हैं, क्योंकि इसका सीधा असर उनके परिवारों और भविष्य के शैक्षिक विनिमय कार्यक्रमों पर पड़ता है। विश्वविद्यालय परिसर में भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, लेकिन आयोजकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
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