राजनीति
रूसी राष्ट्रपति पुतिन का भारत को एसयू-57 स्टील्थ जेट का प्रस्ताव, सह-उत्पादन के लिए दिया संकेत
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 05:30 pm

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भारत को अपने आधुनिक पांचवीं पीढ़ी के एसयू-57 लड़ाकू विमान देने की पेशकश की है, जिसमें भारत में स्थानीय उत्पादन की संभावना भी शामिल है।
सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत के साथ रक्षा संबंधों को और गहरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। पुतिन ने नई दिल्ली को रूस का सबसे आधुनिक पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट, सुखोई एसयू-57 (Su-57) देने की पेशकश की है। विशेष बात यह है कि इस प्रस्ताव में न केवल विमानों की बिक्री, बल्कि भारत के भीतर इनके सह-उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण के संकेत भी दिए गए हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी वायु सेना की मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए वैश्विक बाजारों की ओर देख रहा है।
रूसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि रूस भारत के साथ उच्च-स्तरीय सैन्य सहयोग जारी रखने के लिए तैयार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एसयू-57 जैसा उन्नत विमान भारत की रक्षा क्षमताओं को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकता है। इससे पहले भारत और रूस 'फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट' (FGFA) परियोजना पर साथ काम कर रहे थे, लेकिन तकनीकी और वित्तीय मतभेदों के कारण भारत ने साल 2018 में इस परियोजना से हाथ खींच लिए थे। अब पुतिन की इस ताजा पेशकश को उस सहयोग को फिर से जीवित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि रूस का यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'मेक इन इंडिया' पहल के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश है। रूस जानता है कि भारत अब केवल खरीदार नहीं रहना चाहता, बल्कि अपनी जमीन पर रक्षा उपकरणों का निर्माण करना चाहता है। यदि यह सौदा आगे बढ़ता है, तो यह ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना की तरह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता है। हालांकि, भारत के लिए यह निर्णय इतना सरल नहीं होगा, क्योंकि उसे अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों के साथ अपने बढ़ते रक्षा संबंधों और संभावित प्रतिबंधों (CAATSA) के जोखिम को भी ध्यान में रखना होगा।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के विशेषज्ञों के लिए यह खबर रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया, जो अमेरिका का एक प्रमुख सहयोगी है और 'क्वाड' (QUAD) समूह का हिस्सा है, इस क्षेत्र में सैन्य संतुलन पर करीबी नजर रखता है। भारत द्वारा रूसी तकनीक अपनाने या पश्चिमी देशों (जैसे राफेल या एफ-21) की ओर झुकाव दिखाने का सीधा असर क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर पड़ता है। मेलबर्न और सिडनी में बैठे रणनीतिक विश्लेषक इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या भारत रूस के साथ अपना दशकों पुराना भरोसा कायम रखेगा या भविष्य की जरूरतों के लिए पश्चिमी तकनीक को प्राथमिकता देगा।
फिलहाल, भारत सरकार ने इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। भारतीय वायुसेना वर्तमान में अपने स्वदेशी 'एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' (AMCA) कार्यक्रम पर ध्यान केंद्रित कर रही है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत रूसी पेशकश को अपने स्वदेशी कार्यक्रम के पूरक के रूप में देखता है या अपनी तत्काल जरूरतों के लिए सीधे खरीद का रास्ता चुनता है।
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