राजनीति
अमेठी की मतदाता सूची से कटा स्मृति ईरानी का नाम, प्रशासनिक गलियारों में हलचल; एसडीएम ने दी सफाई
ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 01:31 am

पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का नाम अमेठी की मतदाता सूची से हटा दिया गया है, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन ने इसे नियमों के तहत की गई कार्रवाई बताया है।
उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी का नाम स्थानीय मतदाता सूची से हटा दिया गया है। उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए जारी की गई संशोधित मतदाता सूची में उनका नाम शामिल नहीं है। इस घटनाक्रम के बाद अमेठी के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि स्मृति ईरानी लंबे समय तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
अमेठी के उप-जिलाधिकारी (SDM) ने इस मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि स्थापित निर्वाचन नियमों के तहत की गई है। प्रशासन के अनुसार, मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान के दौरान यह पाया गया कि स्मृति ईरानी अब उस पते पर निवास नहीं कर रही हैं, जहाँ उनका नाम दर्ज था। नियमों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति किसी निर्वाचन क्षेत्र में छह महीने से अधिक समय तक अनुपस्थित रहता है या अपना निवास स्थान बदल लेता है, तो उसका नाम संबंधित सूची से हटा दिया जाता है।
स्मृति ईरानी ने साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के गढ़ अमेठी में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, हालांकि 2024 के आम चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव के बाद से ही उनके क्षेत्र में सक्रियता और निवास को लेकर सवाल उठ रहे थे। प्रशासन का कहना है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया एक सामान्य प्रशासनिक अभ्यास है और इसके लिए बाकायदा सर्वे किया गया था।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय (डिआस्पोरा) के लिए यह खबर विशेष रुचि रखती है, क्योंकि स्मृति ईरानी एक वैश्विक स्तर पर पहचानी जाने वाली भारतीय राजनीतिज्ञ रही हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में गहरी रुचि रखते हैं, इस घटनाक्रम को आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियों और बदलते समीकरणों के तौर पर देख रहे हैं।
विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कुछ नेताओं का तर्क है कि स्मृति ईरानी का नाम हटना इस बात का संकेत है कि भाजपा अब क्षेत्र में अपने पुराने चेहरों से आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। वहीं, भाजपा समर्थकों का कहना है कि यह केवल एक तकनीकी मामला है और इसे तूल देना व्यर्थ है। फिलहाल, जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि कोई आपत्ति दर्ज कराई जाती है, तो नियमों के दायरे में रहकर उस पर विचार किया जा सकता है।
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