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गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर महाभिषेक व महाआरती: आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया गया गुरु पर्व
ICN24 Newsroom 21 जुल॰ 2026, 05:35 pm

गुरुपूर्णिमा के अवसर पर झाबुआ के पेटलावद में भव्य महाभिषेक और महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में शीश नवाया।
गुरुपूर्णिमा का पावन पर्व देशभर में बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले की पेटलावद तहसील के समीपवर्ती क्षेत्रों में भी गुरु भक्ति की बयार देखने को मिली। गुरु पूर्णिमा के इस विशेष अवसर पर स्थानीय आश्रमों और मंदिरों में विशेष महाभिषेक एवं महाआरती का भव्य आयोजन किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था, जो अपने गुरुओं का आशीर्वाद लेने और आध्यात्मिक शांति की खोज में मंदिर पहुंचे।
धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत तड़के महाभिषेक के साथ हुई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान और गुरु स्वरूप विग्रहों का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया गया। इस प्रक्रिया में स्थानीय पंडितों और मुख्य पुजारियों ने विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई। अभिषेक के उपरांत भव्य श्रृंगार किया गया, जिसकी छटा देखते ही बनती थी। इसके बाद आयोजित महाआरती में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए। ढोल-मजीरों और शंख की ध्वनि के बीच 'गुरुदेव' के जयकारों से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा।
गुरु पूर्णिमा का महत्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त करने का दिन है। हिंदू संस्कृति में गुरु को गोविंद यानी ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। पेटलावद में आयोजित इस कार्यक्रम में न केवल स्थानीय निवासी, बल्कि आसपास के गांवों से भी लोग बड़ी संख्या में पहुंचे। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद का भी वितरण किया गया, जिसे ग्रहण करने के लिए लंबी कतारें देखी गईं।
वैश्विक स्तर पर भी इस पर्व की महत्ता बढ़ती जा रही है। विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए ऐसे आयोजन सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का माध्यम बनते हैं। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में स्थित हिंदू मंदिरों और सांस्कृतिक केंद्रों में भी ठीक इसी प्रकार के आयोजन किए जाते हैं। आईएनसी24 (ICN24) से बात करते हुए मेलबर्न निवासी एक प्रवासी भारतीय ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में भी गुरु पूर्णिमा के दिन मंदिरों में भजन-कीर्तन और गुरु वंदना के कार्यक्रम होते हैं, जो उन्हें अपनी मिट्टी और संस्कृति की याद दिलाते हैं।
पेटलावद में हुए इस आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि आधुनिकता के इस दौर में भी लोगों के मन में अपने आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति अटूट विश्वास बना हुआ है। कार्यक्रम के अंत में गुरुओं द्वारा शांति और जन-कल्याण का संदेश दिया गया। प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। यह उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में सद्भाव और शिक्षा के महत्व को रेखांकित करने वाला एक मंच साबित हुआ।
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