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तेलंगाना: धारा 22A के तहत प्रतिबंधित भूमि विवादों पर सरकार का बड़ा फैसला, 45 दिनों में होगा समाधान

ICN24 Newsroom 6 अग॰ 2026, 09:37 am
तेलंगाना: धारा 22A के तहत प्रतिबंधित भूमि विवादों पर सरकार का बड़ा फैसला, 45 दिनों में होगा समाधान

तेलंगाना सरकार ने धारा 22ए के तहत प्रतिबंधित भूमि विवादों को 45 दिनों के भीतर सुलझाने का निर्देश दिया है, जिससे प्रवासी भारतीयों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

तेलंगाना सरकार ने राज्य में लंबे समय से लंबित भूमि विवादों, विशेष रूप से पंजीकरण अधिनियम की धारा 22ए (Section 22A) के तहत आने वाली 'प्रतिबंधित संपत्तियों' को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। राज्य के राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने हाल ही में राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की और उन्हें निर्देश दिया कि वे धारा 22ए से संबंधित सभी शिकायतों और विवादों का निपटारा 45 दिनों की निर्धारित समय सीमा के भीतर करें। यह समय सीमा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। धारा 22ए मुख्य रूप से उन भूखंडों से संबंधित है जिन्हें सरकार द्वारा पंजीकरण के लिए प्रतिबंधित किया गया है। इसमें सरकारी भूमि, बंदोबस्ती (Endowment) भूमि, वक्फ बोर्ड की जमीन और अन्य विवादित संपत्तियां शामिल होती हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में कई निजी भूस्वामियों ने शिकायत की है कि उनकी वैध संपत्तियों को भी गलत तरीके से इस सूची में डाल दिया गया है, जिससे वे अपनी जमीन न तो बेच पा रहे हैं और न ही उस पर ऋण ले पा रहे हैं। राजस्व मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि पारदर्शी तरीके से जांच की जाए और जहां भी साक्ष्य सही पाए जाएं, उन संपत्तियों को प्रतिबंधित सूची से तुरंत हटाया जाए। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य भूमि प्रशासन में पारदर्शिता लाना और आम जनता की परेशानियों को कम करना है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले तेलंगाना मूल के भारतीय समुदाय (NRIs) के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे कई भारतीयों के पास तेलंगाना में पैतृक संपत्ति है, लेकिन धारा 22ए की जटिलताओं के कारण उन्हें अपनी जमीन के प्रबंधन और हस्तांतरण में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। अक्सर लंबी कानूनी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक देरी के कारण प्रवासी भारतीयों के लिए इन मुद्दों को दूर से सुलझाना असंभव हो जाता था। अब 45 दिनों की निश्चित समय सीमा तय होने से, उन अनिवासी भारतीयों को राहत मिलेगी जो अपनी जमीन के मालिकाना हक को स्पष्ट करना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस आदेश को जमीनी स्तर पर सही ढंग से लागू किया गया, तो इससे रियल एस्टेट क्षेत्र में भी तेजी आएगी। भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और विवादों के समाधान से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। तेलंगाना सरकार अब एक विशेष पोर्टल और शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से इन मामलों की निगरानी करने की योजना बना रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन न हो।
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