राजनीति
NEET विरोध प्रदर्शन मामले में 'जीरो एफआईआर' दर्ज: सिलीगुड़ी में दो लोगों के खिलाफ बीएनएस और पॉक्सो के तहत शिकायत
ICN24 Newsroom 6 अग॰ 2026, 10:37 am
वरिष्ठ अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह ने सिलीगुड़ी साइबर पुलिस स्टेशन में अभिजीत दीपके और सौरभ दास के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें गंभीर कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
भारत में इस वर्ष की मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-UG 2024) को लेकर उपजा विवाद अब कानूनी पेचीदगियों में उलझता जा रहा है। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में इस मामले को लेकर एक 'जीरो एफआईआर' (Zero FIR) दर्ज की गई है। यह शिकायत वरिष्ठ अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह द्वारा सिलीगुड़ी साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई है। शिकायत में अभिजीत दीपके और सौरभ दास नामक दो व्यक्तियों को नामजद किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह ने अपनी शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि शिकायत की विस्तृत प्रकृति अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन इसे सोशल मीडिया पर नीट परीक्षा के विरोध से जुड़ी गतिविधियों और उसमें शामिल सामग्री से जोड़कर देखा जा रहा है। 'जीरो एफआईआर' का अर्थ है कि शिकायत किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज की जा सकती है, जिसे बाद में संबंधित अधिकार क्षेत्र वाले स्टेशन को स्थानांतरित कर दिया जाता है।
नीट-यूजी 2024 परीक्षा को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। पेपर लीक के आरोपों और विसंगतियों के कारण लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले कई भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई परिवार अपने बच्चों को उच्च शिक्षा, विशेषकर चिकित्सा विज्ञान (Medical Studies) के लिए भारत भेजते हैं। इस तरह के विवाद और कानूनी कार्यवाहियां भारत की शैक्षिक प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ी करती हैं, जिससे प्रवासी भारतीयों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
अधिवक्ता रिंकी सिंह की इस शिकायत ने मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। बीएनएस (BNS), जो हाल ही में भारतीय दंड संहिता (IPC) के स्थान पर लागू हुआ है, और पॉक्सो (POCSO) जैसी गंभीर धाराओं का उपयोग यह संकेत देता है कि मामला केवल प्रशासनिक विफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें डिजिटल सामग्री और सुरक्षा से जुड़े गहरे पहलू शामिल हो सकते हैं। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है और यह देखने वाली बात होगी कि यह जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
इस मामले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी बहस छेड़ दी है। कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नीट जैसे राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी सीमाओं के बीच एक बारीक रेखा होती है। आईसीएम24 (ICN24) इस मामले की बारीकी से निगरानी कर रहा है ताकि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय परिवारों तक सटीक और निष्पक्ष जानकारी पहुंचाई जा सके। भारत की शीर्ष जांच एजेंसियां पहले से ही पेपर लीक मामले की जांच कर रही हैं, और अब इस नई एफआईआर ने कानूनी लड़ाई को और तेज कर दिया है।
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