टेक्नोलॉजी
₹33 लाख से अधिक का पैकेज: जानें कैसे भारतीय CXO और VP लेवल के अधिकारी AI के जरिए बढ़ा रहे हैं अपनी सैलरी
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 05:41 pm

भारतीय कॉरपोरेट जगत में अब AI कौशल सिर्फ इंजीनियरों तक सीमित नहीं है। नेतृत्व स्तर के अधिकारी भारी वेतन वृद्धि के लिए AI अपस्किलिंग का सहारा ले रहे हैं।
भारतीय कॉरपोरेट परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहाँ तकनीकी कौशल अब केवल इंजीनियरिंग विभागों तक सीमित नहीं रह गया है। हालिया रुझानों के अनुसार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CXO) और उपाध्यक्ष (VP) स्तर के भारतीय पेशेवर अपनी रणनीतिक क्षमताओं को बढ़ाने और उच्च वेतन पैकेज प्राप्त करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से उपयोग कर रहे हैं। विशेष रूप से, 33 लाख रुपये प्रति वर्ष (LPA) से अधिक के क्लब में शामिल होने वाले अधिकारियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य कारण उनका AI के प्रति नया दृष्टिकोण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी क्षमता अब केवल एक अलग विभाग नहीं, बल्कि पूरे कार्यबल के लिए एक अनिवार्य परत बन गई है। पहले जहाँ AI को केवल 'कोडिंग' या 'डेटा साइंस' तक सीमित माना जाता था, अब इसका उपयोग निर्णय लेने, परिचालन दक्षता बढ़ाने और भविष्य के बाजार रुझानों का अनुमान लगाने के लिए किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में काम करने वाले कई भारतीय पेशेवर भारत के साथ मिलकर प्रोजेक्ट्स पर काम करते हैं या भविष्य में भारतीय स्टार्टअप्स में वापसी की योजना बना रहे हैं।
आईसीएन24 (ICN24) की रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग जगत में अब ऐसे नेतृत्व की मांग है जो न केवल अपनी टीम को संभाल सके, बल्कि यह भी समझ सके कि जनरेटिव एआई (GenAI) जैसे टूल्स का इस्तेमाल बिजनेस मॉडल को बेहतर बनाने के लिए कैसे किया जाए। कंपनियां ऐसे लीडर्स को प्रीमियम सैलरी देने के लिए तैयार हैं जो डिजिटल बदलाव का नेतृत्व कर सकें। कई मामलों में, इन अधिकारियों ने अपनी सैलरी में 30% से 50% तक की वृद्धि देखी है, जो सीधे तौर पर उनकी AI दक्षता से जुड़ी है।
भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई बाजार के बीच बढ़ते डिजिटल संबंधों को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि कौशल विकास का यह पैमाना वैश्विक हो गया है। ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत भारतीय तकनीकी विशेषज्ञ जो नेतृत्व की भूमिकाओं में जाने की आकांक्षा रखते हैं, उनके लिए भी AI अपस्किलिंग एक अनिवार्य शर्त बन गई है। यह केवल टूल्स सीखने के बारे में नहीं है, बल्कि इस बारे में है कि कैसे एक 'टेक-फर्स्ट' माइंडसेट के साथ पूरे संगठन की कार्यप्रणाली को बदला जाए।
अंततः, भारतीय कॉरपोरेट जगत में '₹33 LPA क्लब' में शामिल होना अब केवल अनुभव का मामला नहीं रहा, बल्कि यह आधुनिक तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की क्षमता पर निर्भर करता है। जो अधिकारी इस बदलाव को अपना रहे हैं, वे न केवल सुरक्षित हैं बल्कि बाजार में उनकी मांग भी सबसे अधिक है।
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