राजनीति
ईरान पर अमेरिकी हमले की आठवीं रात: 50 हजार सैनिक हाई अलर्ट पर, मिडिल ईस्ट में महायुद्ध के आसार
ICN24 Newsroom 20 जुल॰ 2026, 03:35 pm

मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है क्योंकि अमेरिकी सेना ने लगातार आठवीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। 50,000 अमेरिकी सैनिक हाई अलर्ट पर हैं।
मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखते हुए लगातार आठवीं रात भी भीषण बमबारी की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और क्षेत्र में अमेरिकी हितों की रक्षा करना है।
पेंटागन के सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, लंबी दूरी के निगरानी रडार, समुद्री ठिकाने और विशेष रूप से मिसाइल एवं ड्रोन स्टोरेज साइट्स शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन 'सटीक हमलों' (precision strikes) से ईरान के रसद और हमलावर ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई क्षेत्र में जारी अस्थिरता और ईरान समर्थित समूहों की गतिविधियों के जवाब में की गई है।
इस सैन्य अभियान के साथ ही, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में तैनात अपने लगभग 50,000 सैनिकों को 'हाई अलर्ट' पर रहने के आदेश दिए हैं। इस लामबंदी का उद्देश्य किसी भी संभावित जवाबी हमले को रोकना और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है। क्षेत्र में विमान वाहक पोतों (aircraft carriers) और लड़ाकू विमानों की अतिरिक्त तैनाती ने युद्ध की आशंकाओं को और प्रबल कर दिया है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम चिंता का विषय है। मिडिल ईस्ट में किसी भी बड़े संघर्ष का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ता है, जिससे ऑस्ट्रेलिया में ईंधन की दरें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, खाड़ी देशों में लाखों भारतीय प्रवासी काम करते हैं, जिनके परिवारों का एक बड़ा हिस्सा ऑस्ट्रेलिया में भी बसा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों के लिए खाड़ी क्षेत्र व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए वहां की अस्थिरता का प्रभाव सिडनी से लेकर दिल्ली तक महसूस किया जा रहा है।
कूटनीतिक स्तर पर, भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही देशों ने संयम बरतने की अपील की है। हालांकि, जमीनी हालात संकेत दे रहे हैं कि यदि तनाव जल्द ही कम नहीं हुआ, तो यह एक पूर्ण पैमाने के क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि आगामी कुछ दिन वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।
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