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मध्य प्रदेश: पीएचई विभाग में पदोन्नति नियमों पर रार, कर्मचारियों ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
ICN24 Newsroom 22 जुल॰ 2026, 04:35 pm
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मध्य प्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर विवाद गहरा गया है। कर्मचारी संगठनों ने विभाग पर पदोन्नति नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
भोपाल: मध्य प्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया एक बड़े प्रशासनिक विवाद में फंस गई है। राज्य कर्मचारी संगठनों और कर्मचारी कल्याण समिति ने विभाग के उच्चाधिकारियों पर स्थापित नियमों के विरुद्ध जाकर कर्मचारियों की पदोन्नति रोकने का गंभीर आरोप लगाया है। मुख्य विवाद सहायक ग्रेड-3 के पदों पर पदोन्नत होने के लिए आवश्यक सी.पी.सी.टी. (कंप्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा) उत्तीर्ण करने की समयसीमा को लेकर खड़ा हुआ है।
विवाद की जड़ में सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) का वह परिपत्र है, जो 1 अप्रैल 2003 को जारी किया गया था। इस नियम के अनुसार, यदि कोई भृत्य या समकक्ष चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नत होता है, तो उसे पदोन्नति का आदेश जारी होने की तिथि से आगामी 2 वर्ष के भीतर सी.पी.सी.टी. परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। हालांकि, कर्मचारी संघों का आरोप है कि पीएचई विभाग के अधिकारी इन कर्मचारियों को पदोन्नति देने से पहले ही परीक्षा उत्तीर्ण करने का दबाव बना रहे हैं। यह कदम न केवल शासन के आदेशों की अवहेलना है, बल्कि कर्मचारियों के करियर में बाधा डालने वाला भी है।
मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ और शासकीय/अर्द्धशासकीय वाहन चालक यांत्रिक कर्मचारी कल्याण संघ ने इस मामले में कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि प्रदेश के अन्य सरकारी विभागों में इसी नियम के तहत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को तृतीय श्रेणी के पदों पर पदोन्नति दी जा रही है और उन्हें निर्धारित दो वर्ष की छूट भी प्रदान की जा रही है। लेकिन पीएचई विभाग में इस प्रक्रिया को जानबूझकर जटिल बनाया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है। संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि इस 'विभागीय लेटलतीफी' और भेदभावपूर्ण रवैये को तुरंत नहीं सुधारा गया, तो वे उच्च न्यायालय की शरण में जाने के लिए मजबूर होंगे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश चन्द्र शर्मा ने भी इसमें हस्तक्षेप किया है। उन्होंने विभाग के प्रमुख सचिव और संबंधित मंत्री को पत्र लिखकर इस विसंगति को दूर करने का अनुरोध किया है। उन्होंने मांग की है कि अधीनस्थ कार्यालयों को तत्काल स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं कि वे सामान्य प्रशासन विभाग के 2003 के नियमों का अक्षरशः पालन करें।
वर्तमान में, पीएचई विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय ने इस उलझन को सुलझाने के लिए शासन से नए सिरे से मार्गदर्शन मांगा है। विभाग इस बात पर संशय में है कि क्या पदोन्नति से पूर्व कंप्यूटर परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य बनाया जा सकता है। इस प्रशासनिक खींचतान के बीच सैकड़ों कर्मचारी अपनी पदोन्नति की आस लगाए बैठे हैं, जो पिछले कई वर्षों से सेवा में हैं। यह मुद्दा मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह सीधे तौर पर निचले स्तर के सरकारी कर्मचारियों के आर्थिक और पेशेवर हितों से जुड़ा है।
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