राजनीति
ड्रिंकिंग कल्चर और क्रिकेट: बेन स्टोक्स ने इंग्लैंड टीम के बदलते व्यवहार पर साझा किए विचार
ICN24 Newsroom 5 अग॰ 2026, 01:37 am

इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स ने स्पष्ट किया है कि पेशेवर क्रिकेट अब शराब की संस्कृति से दूर हो गया है, जबकि यूके के क्लब क्रिकेट में यह अब भी गहराई से जुड़ा है।
इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स ने हाल ही में क्रिकेट और शराब के बीच के ऐतिहासिक संबंधों पर खुलकर अपनी राय रखी है। एक इंटरव्यू के दौरान स्टोक्स ने कहा कि हालांकि यूनाइटेड किंगडम (यूके) में क्रिकेट का शराब के साथ एक पुराना और गहरा नाता रहा है, लेकिन वर्तमान इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम इस तथाकथित 'ड्रिंकिंग कल्चर' से कोसों दूर आ चुकी है। स्टोक्स का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पेशेवर खेलों में फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य को सर्वोपरि माना जा रहा है।
स्टोक्स ने स्वीकार किया कि यूके में जमीनी स्तर या क्लब क्रिकेट में मैच के बाद पब जाना और साथियों के साथ शराब पीना एक सामाजिक परंपरा रही है। उन्होंने बताया कि प्रशंसकों और पुराने खिलाड़ियों के लिए यह खेल का एक अभिन्न हिस्सा रहा है। हालांकि, जब बात राष्ट्रीय टीम की आती है, तो स्थिति पूरी तरह से अलग है। कप्तान के अनुसार, आधुनिक युग के खिलाड़ी अपनी फिटनेस और रिकवरी को लेकर इतने सचेत हैं कि वे खेल के दौरान या तैयारी के समय शराब से दूरी बनाए रखते हैं।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी यह विषय काफी प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया में भी क्रिकेट देखने और खेलने के दौरान शराब पीने की एक लंबी परंपरा रही है, जिसे अक्सर 'मैच डे एक्सपीरियंस' का हिस्सा माना जाता है। लेकिन विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों के आने के बाद, जिन्होंने अपनी फिटनेस से पूरी दुनिया में एक नया मापदंड स्थापित किया है, भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई मूल के युवा क्रिकेटरों की सोच में भी बड़ा बदलाव आया है। अब खिलाड़ी अपनी डाइट और अनुशासन को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करना चाहते।
बेन स्टोक्स ने अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा कि 'बैज़बॉल' (Bazball) के इस दौर में टीम का ध्यान केवल आक्रामक क्रिकेट खेलने पर है। उन्होंने कहा कि टीम के भीतर एक ऐसा माहौल तैयार किया गया है जहां सफलता का जश्न मनाने के लिए शराब पर निर्भर होने की आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय, खिलाड़ी एक-दूसरे की कंपनी और खेल की बारीकियों पर चर्चा करना अधिक पसंद करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्टोक्स का यह बयान खेल की बदलती छवि को दर्शाता है। पहले के समय में एंड्रयू फ्लिंटॉफ जैसे खिलाड़ियों के दौर में शराब से जुड़ी खबरें अक्सर सुर्खियों में रहती थीं, लेकिन आज का खिलाड़ी एक ग्लोबल आइकन है जो अपनी शारीरिक क्षमता को चरम पर रखना चाहता है। यह बदलाव न केवल इंग्लैंड में, बल्कि ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे देशों में भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जहां क्रिकेट अब महज एक खेल नहीं बल्कि एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी पेशा बन चुका है।
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