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कनाडा ने माता-पिता और दादा-दादी के लिए पीआर प्रोग्राम पर लगाई रोक, 2026 तक करना होगा इंतजार
ICN24 Newsroom 21 जुल॰ 2026, 07:35 pm

कनाडा सरकार ने माता-पिता और दादा-दादी के प्रायोजन (PGP) कार्यक्रम को 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया है, जिससे भारतीय प्रवासियों की योजनाओं को बड़ा झटका लगा है।
कनाडा सरकार ने अपने हालिया 'इमिग्रेशन लेवल्स प्लान 2025-2027' के तहत एक बड़ा निर्णय लेते हुए माता-पिता और दादा-दादी के प्रायोजन (PGP) कार्यक्रम के लिए नए आवेदनों पर अस्थायी रोक लगा दी है। इमिग्रेशन, रिफ्यूजी और सिटीजनशिप कनाडा (IRCC) के इस फैसले के अनुसार, अब इस श्रेणी में नए आमंत्रण 2026 से पहले जारी नहीं किए जाएंगे। यह कदम कनाडा की आव्रजन प्रणाली को सुव्यवस्थित करने और पहले से लंबित पड़े आवेदनों (बैकलॉग) को कम करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
कनाडा के इस निर्णय का सबसे गहरा प्रभाव वहां रह रहे भारतीय समुदाय पर पड़ने की संभावना है। भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक और स्थायी निवासी बड़ी संख्या में अपने माता-पिता को भारत से बुलाने के लिए इस कार्यक्रम का उपयोग करते हैं। नई नीति के तहत, सरकार ने कुल स्थायी निवास लक्ष्यों में भी कटौती की है, जिससे आने वाले वर्षों में प्रवासियों की संख्या नियंत्रित रहेगी। 2025 में कनाडा का लक्ष्य लगभग 3,95,000 नए स्थायी निवासियों का है, जो कि पिछले वर्षों के लक्ष्यों से काफी कम है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। जिस तरह कनाडा ने अपने पैरेंट वीजा नियमों को कड़ा किया है, ठीक वैसी ही स्थिति ऑस्ट्रेलिया में भी देखी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया के 'कंट्रीब्यूटरी पैरेंट वीजा' (सबक्लास 143) और 'नॉन-कंट्रीब्यूटरी पैरेंट वीजा' (सबक्लास 103) के लिए प्रतीक्षा समय वर्तमान में कई वर्षों, और कुछ मामलों में दशकों तक पहुंच गया है। कनाडा के इस ताजा फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि विकसित देश अब अपने सामाजिक और बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाले बोझ को कम करने के लिए पारिवारिक आव्रजन पर लगाम लगा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जो लोग अपने माता-पिता को कनाडा बुलाना चाहते हैं, उनके लिए अब 'सुपर वीजा' एकमात्र व्यावहारिक विकल्प बचा है। सुपर वीजा एक बहु-प्रवेश (multi-entry) वीजा है जो माता-पिता और दादा-दादी को एक बार में पांच साल तक कनाडा में रहने की अनुमति देता है, जिसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है। हालांकि, यह स्थायी निवास (PR) का विकल्प नहीं है और इसके लिए प्रायोजक को स्वास्थ्य बीमा और वित्तीय स्थिरता के कड़े मानकों को पूरा करना होता है।
आंकड़ों के अनुसार, कनाडा में पीआर के लिए आवेदन करने वाले देशों में भारत शीर्ष पर रहता है। पीजीपी प्रोग्राम पर इस रोक से उन हजारों परिवारों की उम्मीदों को धक्का लगा है जो अपने बुजुर्गों को स्थायी रूप से साथ रखने की योजना बना रहे थे। आव्रजन विशेषज्ञों का सुझाव है कि आवेदकों को अब 2026 के अपडेट का इंतजार करना चाहिए और इस दौरान अपने दस्तावेज़ और वित्तीय योग्यता को मजबूत करना चाहिए।
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