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चेन्नई: तिरुमंगलम अम्मा कैंटीन के बाहर कचरे का अंबार, बदबू और गंदगी के बीच भोजन करने को मजबूर लोग
ICN24 Newsroom 12 जुल॰ 2026, 01:31 pm

चेन्नई के तिरुमंगलम में अम्मा उनावगम के बाहर जमा कचरे और भारी बदबू ने स्थानीय लोगों और भोजन करने वालों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है।
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में किफायती भोजन का पर्याय बन चुके 'अम्मा उनावगम' (अम्मा कैंटीन) इन दिनों अपनी बदहाली के कारण चर्चा में हैं। चेन्नई के तिरुमंगलम इलाके में स्थित कैंटीन की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बनी हुई है, जहां आने वाले लोगों का स्वागत सुगंधित भोजन के बजाय कूड़े के ढेर और असहनीय दुर्गंध से हो रहा है। स्थानीय निवासियों और यहां नियमित रूप से भोजन करने वालों ने शिकायत की है कि कैंटीन के मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक बाहर बड़े-बड़े कूड़ेदान रखे गए हैं, जो अक्सर गंदगी से लबालब भरे रहते हैं।
इस मामले में सबसे विडंबनापूर्ण पहलू यह है कि जहां निजी रेस्टोरेंट और भोजनालय अपनी साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं, वहीं एक सरकारी जन-कल्याणकारी संस्थान के बाहर कचरे का इस तरह खुला प्रदर्शन किया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि किसी भी निजी भोजनालय के सामने आपको कभी भी इतने बड़े कूड़ेदान नहीं दिखेंगे, क्योंकि वे जानते हैं कि इससे उनके व्यवसाय पर असर पड़ेगा। हालांकि, अम्मा कैंटीन, जो समाज के सबसे गरीब तबके को सेवा प्रदान करती है, वहां स्वच्छता के मानकों की अनदेखी की जा रही है।
तिरुमंगलम का यह अम्मा उनावगम न केवल स्थानीय मजदूरों और ऑटो चालकों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत है, बल्कि कई छात्र और प्रवासी कामगार भी यहां के किफायती भोजन पर निर्भर हैं। प्रवेश द्वार पर कचरे की मौजूदगी से न केवल भूख मर जाती है, बल्कि यह गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी पैदा कर रहा है। मानसून के करीब आने के साथ, खुले में पड़े इस कचरे से डेंगू, मलेरिया और हैजा जैसी जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। मक्खियों और मच्छरों का जमावड़ा अब कैंटीन के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच रहा है, जहां भोजन तैयार और परोसा जाता है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से तमिल प्रवासियों के लिए, अम्मा उनावगम केवल एक कैंटीन नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा तंत्र का प्रतीक रहा है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय मूल के लोग अक्सर भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हैं। ऑस्ट्रेलिया में खाद्य सुरक्षा के कड़े मानकों (जैसे HACCP) की तुलना में, चेन्नई की इस कैंटीन की स्थिति प्रशासन की बड़ी विफलता को दर्शाती है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय का मानना है कि भारत को भी अब सार्वजनिक सेवाओं में विश्व स्तरीय स्वच्छता मानकों को अपनाने की आवश्यकता है।
ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (GCC) को इस मुद्दे पर कई बार अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। नागरिकों की मांग है कि इन कूड़ेदानों को कैंटीन के प्रवेश द्वार से हटाकर किसी उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाए और नियमित रूप से कचरे का उठाव सुनिश्चित किया जाए। कैंटीन के भीतर और आसपास की स्वच्छता बनाए रखना केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह उन हजारों लोगों के सम्मान और स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है जो अपनी दैनिक पोषण संबंधी जरूरतों के लिए इस सरकारी सेवा पर निर्भर हैं। यदि प्रशासन जल्द नहीं जागा, तो यह स्थान जनसेवा के केंद्र के बजाय बीमारियों का केंद्र बन जाएगा।
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