राजनीति
गुजरात में 'एनालॉग' पनीर और चीज़ पर शिकंजा; टास्क फोर्स करेगी सख्त कार्रवाई
ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 02:37 am
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गुजरात सरकार ने राज्य में नकली पनीर और चीज़ की बिक्री रोकने के लिए टास्क फोर्स बनाई है। स्वास्थ्य विभाग ने 'एनालॉग' डेयरी उत्पादों पर प्रतिबंध का नोटिस जारी किया है।
गुजरात सरकार ने राज्य में खाद्य सुरक्षा मानकों को कड़ा करते हुए नकली या 'एनालॉग' डेयरी उत्पादों की बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। राज्य के गृह राज्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े वरिष्ठ नेतृत्व, हर्ष संघवी ने घोषणा की है कि इस प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। यह कदम स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा बुधवार को जारी की गई उस अधिसूचना के बाद आया है, जिसमें 'अमानकीकृत' (unstandardised) एनालॉग पनीर, चीज़ और मक्खन को प्रतिबंधित कर दिया गया था।
यह निर्णय खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत लिया गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को उन उत्पादों से बचाना है जो दिखने में तो डेयरी उत्पाद जैसे होते हैं, लेकिन असल में उनमें दूध के फैट की जगह वनस्पति तेल और अन्य रसायनों का उपयोग किया जाता है। 'एनालॉग' उत्पाद आमतौर पर सस्ते होते हैं और कई रेस्तरां व होटल लागत कम करने के लिए इनका उपयोग असली पनीर या चीज़ के विकल्प के रूप में करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
मंत्री हर्ष संघवी ने स्पष्ट किया कि नई गठित टास्क फोर्स पूरे राज्य में औचक निरीक्षण और छापेमारी करेगी। उन्होंने कहा कि जो भी विक्रेता या निर्माता इन नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का तर्क है कि डेयरी के नाम पर गैर-डेयरी वसा बेचना न केवल धोखाधड़ी है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी है। गुजरात, जो भारत की 'डेयरी राजधानी' माना जाता है और अमूल जैसे वैश्विक ब्रांडों का घर है, वहां इस तरह के मिलावटी उत्पादों का मिलना चिंता का विषय बना हुआ था।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय अक्सर भारतीय पनीर और डेयरी उत्पादों की शुद्धता को लेकर चिंतित रहते हैं। भारत से निर्यात होने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर इस तरह के कड़े फैसलों का सकारात्मक असर पड़ता है। साथ ही, जब एनआरआई (NRI) गुजरात की यात्रा करते हैं, तो वहां की स्थानीय खाद्य सुरक्षा व्यवस्था उनके विश्वास को मजबूत करती है। खाद्य मानकों में यह सुधार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'मेड इन इंडिया' उत्पादों की विश्वसनीयता को भी बढ़ाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रतिबंध से असली दूध उत्पादकों और पशुपालकों को भी लाभ होगा। जब बाजार से नकली विकल्प हटेंगे, तो शुद्ध दूध से बने उत्पादों की मांग बढ़ेगी। सरकार ने नगर पालिकाओं और स्थानीय निकायों को भी निर्देश दिया है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले भोजनालयों की नियमित जांच करें। यह टास्क फोर्स आधुनिक प्रयोगशालाओं की मदद से नमूनों की जांच करेगी ताकि मिलावट का तुरंत पता लगाया जा सके।
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