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हैक किए गए AI ईमेल अकाउंट्स से लग सकता है करोड़ों का चूना: रिपोर्ट में 'CEO फ्रॉड' को लेकर चेतावनी

ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 01:37 am
हैक किए गए AI ईमेल अकाउंट्स से लग सकता है करोड़ों का चूना: रिपोर्ट में 'CEO फ्रॉड' को लेकर चेतावनी

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हैक किए गए AI-सक्षम ईमेल अकाउंट्स के जरिए 'CEO फ्रॉड' कर $250,000 तक की धोखाधड़ी की जा सकती है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती लोकप्रियता के बीच अब साइबर अपराधियों ने इसे अपना नया हथियार बना लिया है। एक हालिया सुरक्षा रिपोर्ट के अनुसार, हैक किए गए AI-सक्षम ईमेल अकाउंट्स का उपयोग करके हमलावर $250,000 (लगभग 2.1 करोड़ रुपये) तक की बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दे सकते हैं। इस प्रकार की धोखाधड़ी को 'CEO फ्रॉड' या 'बिजनेस ईमेल कॉम्प्रोमाइज' (BEC) कहा जाता है, जहाँ अपराधी कंपनी के बड़े अधिकारियों का रूप धारण कर कर्मचारियों को पैसे ट्रांसफर करने के लिए उकसाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आधुनिक ईमेल सेवाओं में शामिल AI असिस्टेंट हमलावरों के काम को बेहद आसान बना रहे हैं। पहले जहाँ साइबर अपराधियों को किसी कंपनी की कार्यप्रणाली समझने और संवेदनशील जानकारी जुटाने में हफ्तों लग जाते थे, अब AI की मदद से वे कुछ ही मिनटों में यह काम पूरा कर लेते हैं। ये AI टूल्स पुराने ईमेल थ्रेड्स को स्कैन कर महत्वपूर्ण संपर्कों, वित्तीय लेन-देन के विवरण और अधिकारियों की बातचीत के लहजे (writing style) को तुरंत पहचान लेते हैं। एक नकली हमले (simulated attack) के दौरान यह देखा गया कि कैसे एक हैकर ने AI असिस्टेंट का उपयोग करके यह पता लगाया कि कंपनी में भुगतान की प्रक्रिया क्या है। इसके बाद, AI की मदद से बेहद सटीक और विश्वसनीय 'फिशिंग' ईमेल तैयार किए गए, जो बिल्कुल असली अधिकारी द्वारा लिखे गए प्रतीत होते थे। इस प्रक्रिया के जरिए $250,000 की काल्पनिक चोरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भविष्य में यह खतरा कितना बड़ा हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय और विशेष रूप से यहाँ के छोटे एवं मध्यम स्तर के व्यवसायों (SMEs) के लिए यह खबर एक बड़ी चेतावनी है। ऑस्ट्रेलिया में कई भारतीय मूल के उद्यमी और पेशेवर तकनीकी क्षेत्रों में सक्रिय हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अपराधी अक्सर उन कंपनियों को निशाना बनाते हैं जिनके पास सुरक्षा के कड़े इंतजाम नहीं होते। AI के जरिए अब ये हमले अधिक परिष्कृत और पकड़ में न आने वाले होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि कंपनियों को अब केवल पारंपरिक सुरक्षा उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। 'मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन' (MFA) को अनिवार्य बनाना और कर्मचारियों को AI-आधारित स्कैम के प्रति जागरूक करना अब समय की मांग है। इसके अलावा, किसी भी बड़े वित्तीय लेन-देन से पहले फोन कॉल या अन्य माध्यमों से दोबारा पुष्टि करना सबसे सुरक्षित तरीका है। जैसे-जैसे हम AI पर अपनी निर्भरता बढ़ा रहे हैं, वैसे-वैसे अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखना भी हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
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