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गुरु पूर्णिमा पर हरिद्वार के घाटों पर उमड़ी भारी भीड़: 4 घंटे में हरकी पैड़ी पर 1.5 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
ICN24 Newsroom 29 जुल॰ 2026, 02:37 pm
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह 3 बजे से ही हरकी पैड़ी पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा, जहां केवल चार घंटों में डेढ़ लाख से अधिक लोगों ने गंगा स्नान किया।
धर्मनगरी हरिद्वार में गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर आस्था और श्रद्धा का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। आषाढ़ मास की पूर्णिमा, जिसे गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है, के अवसर पर देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाई। सबसे अधिक भीड़ प्रसिद्ध हरकी पैड़ी पर देखी गई, जहां तड़के 3 बजे से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सुबह के शुरुआती चार घंटों के भीतर ही लगभग 1.5 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा जल में स्नान कर पुण्य लाभ कमाया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु पूर्णिमा को वेदों के रचयिता महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है, क्योंकि भक्त अपने आध्यात्मिक गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए इस पवित्र स्थान पर एकत्रित होते हैं। हरिद्वार के घाटों पर उमड़ी भीड़ इस कदर अधिक थी कि पुलिस और प्रशासन को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। हरकी पैड़ी की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर पैदल यात्रियों का हुजूम दिखाई दिया, जबकि सुरक्षा की दृष्टि से पूरे क्षेत्र में कड़े इंतजाम किए गए थे।
उत्तराखंड पुलिस और मेला प्रशासन ने पहले से ही व्यापक सुरक्षा योजना तैयार की थी। शहर को विभिन्न जोन और सेक्टरों में विभाजित किया गया था ताकि यातायात और भीड़ का प्रबंधन सुचारू रूप से किया जा सके। जल पुलिस की टीमें तैनात रहीं और ड्रोन के माध्यम से घाटों की निगरानी की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई थी और वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए थे। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि स्नान के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो और वृद्धों व बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
इस पर्व का महत्व न केवल भारत में बल्कि ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया भर में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी अत्यधिक है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में बसे प्रवासी भारतीय इस दिन को अपने स्थानीय मंदिरों में गुरु पूजा और विशेष प्रार्थनाओं के माध्यम से मनाते हैं। हरिद्वार से आने वाली ऐसी खबरें प्रवासी भारतीयों को उनकी जड़ों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम करती हैं। कई ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय परिवार इस विशेष दिन पर वर्चुअली हरिद्वार की आरती में शामिल होते हैं या अपने आध्यात्मिक गुरुओं से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
शाम होते-होते श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है, क्योंकि पूर्णिमा की रात गंगा आरती का दृश्य देखने के लिए हजारों भक्त घाटों पर रुकते हैं। हरिद्वार के बाजारों में भी खासी रौनक देखी गई, जहां लोग गुरु पूजन के लिए सामग्री और प्रसाद खरीदते नजर आए। यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह गुरु-शिष्य परंपरा की उस अटूट कड़ी को भी दर्शाता है जो भारतीय समाज का आधार रही है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे स्वच्छता बनाए रखें और गंगा को प्रदूषित न करें, ताकि इस पवित्र स्थल की गरिमा बनी रहे।
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