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सावन की पहली सोमवारी: शिवालयों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, ऑस्ट्रेलिया में भी दिखा उत्साह
ICN24 Newsroom 4 अग॰ 2026, 12:37 pm

सावन के पहले सोमवार पर बोकारो के शिवालयों में भक्तों का तांता लगा रहा। इस धार्मिक उत्सव की गूंज सात समंदर पार ऑस्ट्रेलिया में भी सुनाई दी, जहां प्रवासी भारतीयों ने श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक किया।
सावन के पवित्र महीने की शुरुआत के साथ ही पूरे भारत सहित विदेशों में भी शिव भक्ति की बयार बहने लगी है। सावन की पहली सोमवारी के अवसर पर झारखंड के बोकारो जिले के पेटरवार प्रखंड में धार्मिक उत्साह का माहौल देखा गया। अंगवाली सहित समीपस्थ क्षेत्रों के दर्जनों शिवालयों में तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने कतारों में लगकर भगवान भोले शंकर पर जलाभिषेक किया और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है, और सोमवारी के दिन व्रत रखने व शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पेटरवार के विभिन्न मंदिरों में स्थानीय प्रशासन और पूजा समितियों द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
विशेष रूप से, इस बार सावन का उत्साह केवल भारत तक ही सीमित नहीं रहा। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेषकर झारखंड और बिहार मूल के प्रवासियों ने भी इस पर्व को पूरे उल्लास के साथ मनाया। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में स्थित हिंदू मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। हालांकि ऑस्ट्रेलिया में इस समय शीत ऋतु (Winter) का प्रभाव है, फिर भी श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।
आईसीएन24 (ICN24) से बात करते हुए सिडनी के एक मंदिर के स्वयंसेवक ने बताया कि प्रवासी भारतीय अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए इन त्योहारों को एक माध्यम मानते हैं। यहां के मंदिरों में भी जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए विशेष समय निर्धारित किया गया था ताकि कामकाजी लोग भी अपनी श्रद्धा अर्पित कर सकें।
सावन का यह महीना न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह प्रवासी भारतीयों के लिए अपनी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का एक अवसर भी है। बोकारो के पेटरवार से लेकर ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स तक, शिव भक्ति का यह संगम भारतीय संस्कृति की व्यापकता और उसकी अटूट आस्था का प्रतीक बनकर उभरा है।
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