राजनीति
नीट विवाद: सरकार संसद में चर्चा को तैयार, लेकिन प्रधानमंत्री के बयान पर अड़ा विपक्ष
ICN24 Newsroom 22 जुल॰ 2026, 08:35 pm
केंद्र सरकार ने नीट-यूजी पेपर लीक मामले पर संसद में चर्चा की पेशकश की है, जबकि विपक्षी दल प्रधानमंत्री के बयान और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
नई दिल्ली: नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर देश की राजनीति में उबाल जारी है। केंद्र सरकार ने अब इस संवेदनशील मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में विस्तृत चर्चा करने की इच्छा जताई है। हालांकि, विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (INDIA) इस रुख से संतुष्ट नहीं है और उसने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस विषय पर सदन में वक्तव्य देने की मांग की है। विपक्ष का तर्क है कि यह करोड़ों छात्रों के भविष्य का सवाल है और इस पर सरकार के शीर्ष स्तर से जवाबदेही तय होनी चाहिए।
संसदीय कार्य मंत्री ने संकेत दिया है कि सरकार नियमों के तहत इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। सरकार ने लोकसभा अध्यक्ष से एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का भी आग्रह किया है ताकि सुचारू रूप से चर्चा सुनिश्चित की जा सके। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहले ही स्पष्ट किया है कि सरकार किसी भी दोषी को बख्शने के मूड में नहीं है और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। लेकिन विपक्ष अब भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है, जिससे सदन की कार्यवाही में बार-बार व्यवधान आ रहा है।
दिल्ली की सड़कों पर छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन उग्र होता जा रहा है। जंतर-मंतर और शिक्षा मंत्रालय के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि परीक्षा की शुचिता भंग हुई है और दोबारा परीक्षा (Re-NEET) ही एकमात्र समाधान है। इस विवाद का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी भारतीयों के बीच भी इसकी गहरी चिंता देखी जा रही है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भारत की चिकित्सा शिक्षा प्रणाली का विशेष महत्व है। कई प्रवासी परिवारों के बच्चे भारत जाकर डॉक्टरी की पढ़ाई करने की योजना बनाते हैं या वहां के मेडिकल कॉलेजों से जुड़े रहते हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय अभिभावकों का मानना है कि इस तरह की अनियमितताएं भारतीय शिक्षा प्रणाली की वैश्विक विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती हैं। ICN24 से बात करते हुए कुछ प्रवासियों ने कहा कि पारदर्शी जांच और सख्त कानून ही छात्रों के भरोसे को फिर से बहाल कर सकते हैं।
फिलहाल, मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है और सीबीआई (CBI) इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। संसद में होने वाली आगामी चर्चा से यह साफ होगा कि सरकार विपक्ष के तीखे सवालों का सामना कैसे करती है और क्या छात्रों को कोई ठोस आश्वासन मिल पाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि संसद में गतिरोध जारी रहा, तो यह सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य लंबित हैं।
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