राजनीति
राम मंदिर दान चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, नई SIT जांच के आदेश; CJI बोले- 'इसे राजनीतिक रंग न दें'
ICN24 Newsroom 21 जुल॰ 2026, 12:35 am

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में यूपी सरकार को वरिष्ठ IPS अधिकारी के नेतृत्व में नई SIT बनाने का निर्देश दिया है।
अयोध्या के भव्य राम मंदिर के लिए आए चढ़ावे और दान में कथित हेराफेरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक नए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस टीम का नेतृत्व एक वरिष्ठ आईपीएस (IPS) स्तर के अधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए, ताकि जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने याचिकाकर्ताओं और संबंधित पक्षों को चेतावनी देते हुए कहा कि इस कानूनी मुद्दे को किसी भी तरह का 'राजनीतिक रंग' देने की कोशिश न की जाए। अदालत ने जोर देकर कहा कि दान में हुई कथित चोरी या वित्तीय अनियमितता एक गंभीर विषय है और इसे विशुद्ध रूप से कानून के दायरे में रहकर सुलझाया जाना चाहिए।
यह मामला तब चर्चा में आया जब मंदिर निर्माण और प्रबंधन के लिए जुटाए गए धन में विसंगतियों की शिकायतें सामने आईं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि दान के रूप में मिली भारी भरकम राशि का सही हिसाब-किताब नहीं रखा गया और इसमें बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। इससे पहले की जांच रिपोर्टों पर असंतोष जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अब नई और उच्च स्तरीय जांच का रास्ता साफ कर दिया है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर काफी महत्व रखती है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में रहने वाले हजारों प्रवासी भारतीयों ने राम मंदिर निर्माण के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रवासी भारतीय न केवल धार्मिक रूप से इस मंदिर से जुड़े हैं, बल्कि वे मंदिर के प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर भी संवेदनशील हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश दानकर्ताओं के विश्वास को बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह जल्द से जल्द नई SIT के सदस्यों के नामों को अंतिम रूप दे और जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करे। जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की इस सक्रियता से न केवल दोषियों पर नकेल कसी जा सकेगी, बल्कि भविष्य में धार्मिक ट्रस्टों के संचालन में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। मामले की अगली सुनवाई अब SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद होगी।
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