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संजय दत्त जन्मदिन: जब नशे की लत ने मौत के मुहाने पर ला खड़ा किया था, एक घरेलू सहायक के आंसुओं ने बदली 'संजू बाबा' की तकदीर

ICN24 Newsroom 29 जुल॰ 2026, 12:35 pm
संजय दत्त जन्मदिन: जब नशे की लत ने मौत के मुहाने पर ला खड़ा किया था, एक घरेलू सहायक के आंसुओं ने बदली 'संजू बाबा' की तकदीर

संजय दत्त के 65वें जन्मदिन पर जानिए उनकी जिंदगी का वह काला अध्याय, जब नशे के कारण वे मौत के करीब पहुंच गए थे और कैसे एक छोटी सी घटना ने उन्हें नई जिंदगी दी।

भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित और प्रभावशाली अभिनेताओं में से एक, संजय दत्त आज अपना 65वां जन्मदिन मना रहे हैं। 'खलनायक' से 'मुन्ना भाई' तक का उनका सफर जितना फिल्मी पर्दे पर रोमांचक रहा है, असल जिंदगी में उससे कहीं ज्यादा उतार-चढ़ाव भरा रहा है। आज जब दुनिया भर में, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच उनकी लोकप्रियता चरम पर है, तो उनके जीवन के उस अंधेरे अध्याय को याद करना जरूरी है जिसने उन्हें पूरी तरह बदल दिया। 80 के दशक की शुरुआत में संजय दत्त नशे की लत के गहरे दलदल में फंस चुके थे। यह वह दौर था जब उनकी पहली फिल्म 'रॉकी' रिलीज होने वाली थी, लेकिन स्टारडम की चमक के पीछे एक डरावनी सच्चाई छिपी थी। संजय दत्त ने स्वयं कई साक्षात्कारों में स्वीकार किया है कि एक समय ऐसा था जब उन्होंने लगभग हर प्रकार के ड्रग्स का सेवन किया था। उनके जीवन का सबसे भयावह क्षण तब आया जब एक रात अत्यधिक नशे के बाद वे सोए और सीधे दो दिन बाद जागे। संजय दत्त बताते हैं कि जब उनकी आंखें खुलीं, तो उन्हें बहुत तेज भूख महसूस हुई। उन्होंने अपने घर के पुराने नौकर को बुलाया और खाना मांगा। लेकिन जैसे ही उस घरेलू सहायक ने संजय को देखा, वह फूट-फूट कर रोने लगा। संजय ने जब रोने का कारण पूछा, तो उसने जो कहा उसने अभिनेता की रूह कंपा दी। नौकर ने कहा, 'बाबा, आप दो दिन बाद जागे हैं। हमें लगा कि आप अब इस दुनिया में नहीं रहे।' उस समय संजय ने आईने में अपना चेहरा देखा—आंखें धंसी हुई थीं और चेहरा बेजान हो चुका था। वह पल उनके लिए 'वेक-अप कॉल' साबित हुआ। उन्हें एहसास हुआ कि वे मौत के कितने करीब पहुंच गए थे। इस घटना के बाद संजय दत्त अपने पिता सुनील दत्त के पास गए और उनसे मदद मांगी। सुनील दत्त, जो स्वयं एक दिग्गज अभिनेता और राजनेता थे, ने अपने बेटे को इस संकट से निकालने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। संजय को इलाज के लिए अमेरिका के एक नशामुक्ति केंद्र (रिहैब) भेजा गया। वहां का संघर्ष आसान नहीं था, लेकिन पिता के अटूट विश्वास और संजय की अपनी इच्छाशक्ति ने उन्हें फिर से खड़ा किया। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए संजय दत्त की यह कहानी केवल एक फिल्मी सितारे की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष और वापसी (Comeback) का एक प्रतीक है। आज भी मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में 'संजू बाबा' की फिल्मों का वैसा ही क्रेज है जैसा भारत में। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में कितनी भी बड़ी गलती क्यों न हो जाए, सुधार और नई शुरुआत की गुंजाइश हमेशा रहती है। आज संजय दत्त न केवल एक सफल अभिनेता हैं, बल्कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को मात देकर लाखों लोगों के लिए प्रेरणा भी बन चुके हैं।
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