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सावन 2026: आखिर क्यों सावन के महीने में हरी चूड़ियाँ पहनना माना जाता है शुभ? जानें धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
ICN24 Newsroom 22 जुल॰ 2026, 11:36 pm

सावन के पवित्र महीने में हरी चूड़ियों का विशेष महत्व है। जानिए क्यों महिलाएं इस परंपरा का पालन करती हैं और इसका ज्योतिषीय आधार क्या है।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति के लिए समर्पित सबसे पवित्र समय माना जाता है। वर्ष 2026 में, उत्तर भारत में सावन के महीने की शुरुआत 30 जुलाई से हो रही है। इस महीने में चारों ओर हरियाली की चादर बिछी होती है, लेकिन इस प्राकृतिक सुंदरता के बीच एक परंपरा जो सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करती है, वह है महिलाओं द्वारा हरी चूड़ियाँ पहनना। चाहे भारत हो या ऑस्ट्रेलिया में बसा भारतीय समुदाय, सावन के दौरान हरे रंग का महत्व कम नहीं होता।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरा रंग प्रकृति, उर्वरता और नई शुरुआत का प्रतीक है। भगवान शिव को प्रकृति का रक्षक माना जाता है, और सावन की रिमझिम फुहारें धरती को हरा-भरा कर देती हैं। ऐसा माना जाता है कि माता पार्वती ने भी भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए स्वयं को प्रकृति के रंगों में ढाल लिया था। सुहागिन महिलाओं के लिए हरी चूड़ियाँ उनके पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख का आशीर्वाद लेकर आती हैं। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में, जहाँ भारतीय समुदाय बड़ी संख्या में रहता है, सावन के दौरान मंदिरों में महिलाओं को विशेष रूप से हरे परिधानों और चूड़ियों में देखा जा सकता है, जो उनकी अपनी जड़ों से जुड़ाव को दर्शाता है।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखें तो हरा रंग बुध ग्रह (Mercury) का प्रतिनिधित्व करता है। ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, व्यापार और सौभाग्य का कारक माना जाता है। सावन के महीने में हरा रंग धारण करने से कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है, जिससे व्यक्ति के जीवन में समृद्धि और मानसिक शांति आती है। यही कारण है कि न केवल शादीशुदा महिलाएँ, बल्कि कुंवारी कन्याएँ भी अच्छे वर की प्राप्ति और करियर में सफलता के लिए सावन में हरी चूड़ियाँ पहनती हैं और भगवान शिव का उपवास रखती हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह परंपरा केवल धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपनी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का एक माध्यम भी है। यहाँ के स्थानीय बाजारों और लिटिल इंडिया जैसे क्षेत्रों में सावन के करीब आते ही हरी चूड़ियों और मेहंदी की मांग बढ़ जाती है। 'सावन मिलन' जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से समुदाय की महिलाएँ एकत्रित होती हैं, लोक गीत गाती हैं और इस पारंपरिक शृंगार के माध्यम से अपनी पहचान को जीवंत रखती हैं।
अंततः, सावन में हरी चूड़ियाँ पहनना केवल एक फैशन स्टेटमेंट नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिकता, प्रकृति के प्रति सम्मान और विश्वास का संगम है। यह परंपरा हमें सिखाती है कि प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर चलना ही वास्तविक सुख और समृद्धि का मार्ग है। जैसे-जैसे सावन 2026 नजदीक आ रहा है, मंदिरों और घरों में इसकी तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं, जो श्रद्धा और उल्लास के एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत दे रही हैं।
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