राजनीति
152 पेपर लीक और जीरो सजा; राहुल गांधी का आरोप- भारत की शिक्षा प्रणाली 'हाईजैक' हो चुकी है
ICN24 Newsroom 23 जुल॰ 2026, 12:35 am

राहुल गांधी ने 152 पेपर लीक मामलों में किसी को सजा न मिलने पर सरकार को घेरा और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत की शिक्षा प्रणाली की शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि देश की शिक्षा व्यवस्था को कुछ खास विचारधारा वाले लोगों द्वारा 'हाईजैक' कर लिया गया है। उन्होंने हालिया NEET-UG और UGC-NET परीक्षाओं में हुई धांधली का हवाला देते हुए कहा कि पिछले सात वर्षों में देश में 152 पेपर लीक हुए हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इनमें से एक भी मामले में अब तक किसी को सजा नहीं हुई है।
राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा निशाना साधते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि जब परीक्षाओं की गोपनीयता बार-बार भंग हो रही है, तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री को लेनी चाहिए। गांधी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक की यह समस्या केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि यह एक गहरी संरचनात्मक समस्या है। उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस ने शैक्षणिक संस्थानों में अपने लोगों को बिठा दिया है, जो योग्यता के बजाय विचारधारा को प्राथमिकता देते हैं, जिससे पूरी प्रणाली खोखली हो गई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गांधी ने व्यापम घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि जो कभी मध्य प्रदेश तक सीमित था, उसे अब पूरे देश में लागू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस संवेदनशील मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं। गांधी ने जोर देकर कहा कि पेपर लीक से न केवल छात्रों की मेहनत बेकार जाती है, बल्कि यह देश के विकास की नींव पर भी प्रहार करता है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि छात्रों का विश्वास पुनः बहाल हो सके।
भारत की इस शिक्षा त्रासदी का असर सात समंदर पार ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय पर भी देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में बसे कई भारतीय परिवारों के बच्चे भारत में मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं या उनके रिश्तेदार इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। प्रवासी भारतीयों के लिए भारत की शिक्षा प्रणाली की साख अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारतीय डिग्रियों की वैश्विक मान्यता और प्रतिष्ठा इन परीक्षाओं की पारदर्शिता पर टिकी होती है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के घोटालों से न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय शिक्षा की छवि धूमिल होती है।
राहुल गांधी ने अंत में कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को संसद के आगामी सत्र में पूरी मजबूती के साथ उठाएगा। उन्होंने छात्रों को आश्वासन दिया कि उनकी न्याय की लड़ाई में कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी है। इस राजनीतिक घमासान के बीच, लाखों अभ्यर्थी अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले और सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उनकी वर्षों की मेहनत और उनके करियर का भविष्य स्पष्ट हो सके।
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