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डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा प्रस्ताव: OPT वर्क परमिट के लिए देना पड़ सकता है $100,000 का शुल्क, भारतीय छात्र होंगे प्रभावित
ICN24 Newsroom 1 अग॰ 2026, 06:35 am

डोनाल्ड ट्रंप के नए प्रस्ताव के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को OPT वर्क परमिट के लिए $100,000 का भारी शुल्क देना पड़ सकता है, जिससे भारतीय छात्रों का भविष्य दांव पर है।
वाशिंगटन और वैश्विक शिक्षा जगत में उस समय हलचल मच गई जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम की ओर से अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए एक कड़ा प्रस्ताव सामने आया। इस प्रस्ताव के अनुसार, 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) कार्यक्रम के तहत अमेरिका में काम करने के इच्छुक विदेशी स्नातकों को 100,000 डॉलर (लगभग 84 लाख भारतीय रुपये) का भारी शुल्क चुकाना पड़ सकता है। यह कदम विशेष रूप से भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जो वर्तमान में अमेरिकी विश्वविद्यालयों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा समूह हैं।
OPT कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपनी डिग्री पूरी करने के बाद अमेरिका में एक से तीन साल तक काम करने की अनुमति देता है। विशेष रूप से STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्र के छात्रों के लिए यह अमेरिका में स्थायी निवास या H-1B वीजा प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सीढ़ी है। यदि यह $100,000 का शुल्क लागू होता है, तो यह मध्यमवर्गीय भारतीय परिवारों के लिए अमेरिका में शिक्षा और करियर के सपने को लगभग असंभव बना देगा। अधिकांश छात्र पहले से ही भारी कर्ज लेकर विदेश जाते हैं, और ऐसा अतिरिक्त शुल्क उनकी वित्तीय कमर तोड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति का उद्देश्य अमेरिकी नियोक्ताओं को विदेशी प्रतिभाओं के बजाय स्थानीय अमेरिकी नागरिकों को नियुक्त करने के लिए प्रोत्साहित करना है। हालांकि, तकनीकी और शोध क्षेत्रों में भारत जैसे देशों से आने वाली प्रतिभाओं की भारी मांग है। ट्रंप के इस रुख ने उन छात्रों के बीच अनिश्चितता पैदा कर दी है जो वर्तमान में स्नातक होने वाले हैं या भविष्य में अमेरिका जाने की योजना बना रहे हैं।
इस घटनाक्रम का सीधा असर ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों पर भी पड़ सकता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका की कड़ी आव्रजन नीतियां अक्सर छात्रों को अन्य विकल्पों की ओर धकेलती हैं। यदि अमेरिका इतना महंगा और कठिन हो जाता है, तो भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालयों और यहाँ के 'पोस्ट-स्टडी वर्क' (PSW) अधिकारों की ओर अधिक आकर्षित हो सकते हैं। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया ने भी हाल ही में अपनी छात्र वीजा नीतियों को सख्त किया है, जिससे वैश्विक स्तर पर छात्रों के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं।
भारतीय समुदाय के विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक वित्तीय बोझ नहीं है, बल्कि एक स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका अपनी आव्रजन प्राथमिकताओं को बदल रहा है। यदि यह प्रस्ताव वास्तविकता बनता है, तो भारतीय आईटी पेशेवरों और इंजीनियरों का अमेरिका की ओर पलायन काफी हद तक कम हो सकता है, जिसका लाभ भारत की अपनी बढ़ती अर्थव्यवस्था या ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों को मिल सकता है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय छात्र संगठनों और आव्रजन वकीलों ने इस संभावित नीति पर कड़ी नजर रखी हुई है।
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