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अमेरिकी छात्र वीजा नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी; भारतीयों की बढ़ सकती है मुश्किलें
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 10:53 am

अमेरिकी प्रशासन ने F-1 छात्र वीजा के नियमों में बड़े फेरबदल की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य वीजा प्रणाली के दुरुपयोग को रोकना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है।
वाशिंगटन: संयुक्त राज्य अमेरिका के संघीय प्रशासन ने विदेशी छात्रों के लिए जारी किए जाने वाले F-1 वीजा नियमों में आमूल-चूल परिवर्तन करने का निर्णय लिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य प्रवासी धोखाधड़ी को रोकना और उन खामियों को दूर करना है जिनका उपयोग कई लोग अवैध रूप से रोजगार प्राप्त करने या देश में अनिश्चित काल तक रहने के लिए करते रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में प्रशासन ने इन नियमों को और अधिक सख्त बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
वर्तमान नियमों के तहत, F-1 छात्र वीजा अक्सर 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (D/S) के आधार पर जारी किए जाते हैं। इसका अर्थ है कि जब तक छात्र अपनी पढ़ाई जारी रखता है, उसे वीजा की अवधि बढ़वाने की आवश्यकता नहीं होती। प्रशासन का तर्क है कि इस व्यवस्था में स्पष्ट समाप्ति तिथि न होने के कारण कई प्रवासी, विशेष रूप से भारतीय नागरिक, इसका लाभ उठाकर लंबे समय तक अमेरिका में टिके रहते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कई मामलों में छात्र वीजा का उपयोग केवल काम करने या राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने के बहाने के रूप में किया जा रहा था।
भारतीय समुदाय के लिए यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत, चीन के बाद अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। हजारों भारतीय छात्र हर साल उच्च शिक्षा के लिए अमेरिकी विश्वविद्यालयों का रुख करते हैं। नए नियमों के लागू होने से छात्रों को अब एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपनी पढ़ाई पूरी करनी होगी और वीजा विस्तार के लिए अधिक कठोर जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा। इससे उन छात्रों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो अपनी पढ़ाई के दौरान पार्ट-टाइम काम या इंटर्नशिप के माध्यम से अपना खर्च निकालते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के परिवारों के लिए भी यह एक चिंता का विषय है। अक्सर देखा गया है कि भारतीय परिवारों के रिश्तेदार और बच्चे एक साथ ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका दोनों देशों में शिक्षा और करियर के अवसर तलाशते हैं। अमेरिका में वीजा नियमों के सख्त होने का सीधा असर वैश्विक प्रवास के रुझानों पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका अपनी नीतियों को बहुत अधिक कठोर बनाता है, तो भारतीय छात्रों का झुकाव ऑस्ट्रेलिया या कनाडा जैसे देशों की ओर बढ़ सकता है, हालांकि ऑस्ट्रेलिया ने भी हाल ही में अपने छात्र वीजा नियमों को सख्त किया है।
संघीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कदम केवल उन लोगों को लक्षित करने के लिए है जो कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। हालांकि, नागरिक अधिकार समूहों और शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इससे वैध छात्रों में डर का माहौल पैदा हो सकता है। आने वाले महीनों में इन नियमों के आधिकारिक कार्यान्वयन के बाद ही इसकी पूरी रूपरेखा स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल, विशेषज्ञों की सलाह है कि जो छात्र अमेरिका जाने की योजना बना रहे हैं, वे अपने दस्तावेजों और शैक्षणिक उद्देश्यों को लेकर पूरी तरह पारदर्शी रहें।
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