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वंदे मातरम का अपमान अब पड़ेगा भारी: नए कानून में 3 साल की जेल का प्रावधान, अमित शाह पेश करेंगे विधेयक
ICN24 Newsroom 22 जुल॰ 2026, 03:35 pm

केंद्र सरकार राष्ट्रीय सम्मान अपमान रोकथाम अधिनियम में संशोधन करने जा रही है, जिसके तहत वंदे मातरम के अपमान पर सख्त सजा का प्रावधान होगा।
भारत सरकार 'वंदे मातरम' को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में 'राष्ट्रीय सम्मान अपमान रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश करने वाले हैं। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के अपमान को दंडनीय अपराध बनाना है। वर्तमान में, 1971 का मूल अधिनियम मुख्य रूप से राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के अपमान पर केंद्रित है, लेकिन अब इसमें राष्ट्रीय गीत को भी समान कानूनी संरक्षण देने की तैयारी है।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय गीत का अपमान करता है, उसे जानबूझकर रोकता है या गीत गाए जाने के दौरान अशांति पैदा करता है, तो उसे तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों भुगतने पड़ सकते हैं। सरकार का तर्क है कि 'वंदे मातरम' ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में करोड़ों देशवासियों को प्रेरित किया था और यह गीत भारतीय अस्मिता का एक अभिन्न अंग है। ऐसे में इसकी गरिमा को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक और नैतिक कर्तव्य है।
ऐतिहासिक रूप से, बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित 'वंदे मातरम' ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष में एक मंत्र की तरह काम किया था। आजादी के बाद, इसे राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान दर्जा दिया गया था, हालांकि कानूनी दंड के प्रावधान केवल राष्ट्रगान तक ही सीमित थे। अब इस नए विधेयक के माध्यम से उस विसंगति को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। विधेयक के मसौदे में स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े प्रतीकों का अपमान राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता के प्रति अनादर माना जाएगा।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है। हालांकि भारत के दंडात्मक कानून केवल भारतीय क्षेत्र में लागू होते हैं, लेकिन भारत की यात्रा करने वाले प्रवासी भारतीयों (NRIs) और ओसीआई (OCI) कार्डधारकों के लिए इन नियमों को समझना आवश्यक है। विदेशों में होने वाले सामुदायिक कार्यक्रमों में अक्सर वंदे मातरम गाया जाता है। यह नया कानून एक मानक तय करता है कि सार्वजनिक मंचों पर इस गीत की मर्यादा का पालन किस प्रकार किया जाना चाहिए। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय जो भारत के साथ गहरा सांस्कृतिक जुड़ाव रखता है, इस कदम को राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाले प्रयास के रूप में देख रहा है।
विधेयक के पेश होने के बाद संसद के दोनों सदनों में इस पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन न केवल दंड का प्रावधान करता है, बल्कि यह देश के सांस्कृतिक इतिहास के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक जरिया भी है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस विधेयक को पेश करने की तैयारी पूरी कर ली गई है और इसे जल्द ही सदन के पटल पर रखा जाएगा।
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